भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 301

उत्तरार्ध तेईसवां अध्याय के पैरों में (की परिधि में ) समा गए. यदि आप इस बात को जानते हैं तो हमें बताने की कृपा कीजिए. (४९) अपि तेषु त्रिषु पदेष्वस्मि येषु विश्वं भुवनमा विवेश. सद्यः पर्येमि पृथिवीमुत द्यामेकेनाङ्गेन दिवो अस्य पृष्ठम्.. (५०) जिन में सारे विश्व के भुवन समा गए, उन तीनों पैरों में भी मैं ही हूं. पृथ्वीलोक के ऊपर जो लोक है, उसे मैं इस एक मन रूपी अंग से जान जाता हूं. स्वर्गलोक के आधार पर लोक है. उसे मैं इस एक मन रूपी अंग से जान जाता हूं. (५०) केष्वन्तः पुरुष ऽ आ विवेश कान्यन्तः पुरुषे अर्पितानि. एतद्ब्रह्मन्नुप वल्हामसि त्वा किं स्विन्नः प्रति वोचास्यत्र.. (५१) किस के अंतस्तल में परम पुरुष आ कर रमण करता है? परम पुरुष के अंतस्तल में किन वस्तुओं को अर्पित किया जाता है? हे ब्राह्मण! हम यजमान यह जानने के इच्छुक हैं. आप कृपया हमारी इन जिज्ञासाओं को वाणी प्रदान करने की कृपा कीजिए. (५१) पञ्चस्वन्तः पुरुष ऽ आ विवेश तान्यन्तः पुरुषे अर्पितानि. एतत्त्वात्र प्रतिमन्वानो अस्मि न मायया भवस्युत्तरो मत्.. (५२) आप यह मानते हैं कि आप यह नहीं जानते. अतः मैं माया से अर्थात् आप को मायापूर्वक प्रत्युत्तर देता हूं कि परम पुरुष पांच महाभूतों व पांच तन्मात्राओं में रमण करता है. परम पुरुष को पांच महाभूत व तन्मात्राएं अर्पित हैं. (५२) का स्विदासीत्पूर्वचित्तिः किं स्विदासीद् बृहद्वयः. का स्विदासीत्पिलिप्पिला का स्विदासीत्पिशङ्गिला.. (५३) हे अध्वर्युगण! सब से पहले क्या जानना चाहिए? सब से बड़ा पक्षी कौन सा है? सब से अद्भुत रूप वाला कौन है? वह कौन है, जो सब रूपों को निगल जाता है. (५३) द्यौरासीत्पूर्वचित्तिरश्व ऽ आसीद् बृहद्वयः. अविरासीत्पिलिप्पिला रात्रिरासीत्पिशङ्गिला.. (५४) सब से पहले स्वर्गलोक को जानना चाहिए. सब से बड़ा पक्षी अग्नि रूपी अश्व है. पृथ्वी सब से अधिक रूपों को निगलने वाली है. रात्रि सभी रूपों को निगल जाने वाली होती है. (५४) का ईमरे पिशङ्गिला का ईं कुरुपिशङ्गिला. क ऽ ईमास्कन्दमर्षति क ऽ ईं पन्थां वि सर्पति.. (५५) यजुर्वेद - ३०१