भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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उत्तरार्ध पच्चीसवां अध्याय यह अच्छी तरह देवताओं को प्राप्त कराने वाला है. यह हमें अपने वश में रखे, पुत्र व पौत्र प्रदान करे. हम सब को धन से पुष्ट करे व गरीबी व पाप से दूर रखे. हमें बलवान बनाए. हम इस के लिए हविमान हैं. ( ४५ ) इमा नु कं भुवना सीषधामेन्द्रश्च विश्वे च देवा:. आदित्यैरिन्द्र: सगणो मरुद्भिरस्मभ्यं भेषजा करत्. यज्ञं च नस्तन्वं च प्रजां चादित्यैरिन्द्र: सह सीषधाति.. (४६) इंद्र देव तथा सभी देव सभी भुवनों को अपने वश में रखें. आदित्यगण मरुद्गण तथा इंद्र देव अपने गण सहित हमें निरोग रखें. यह यज्ञ इंद्र देव और आदित्यगण सहित हमारे शरीर और प्रजाओं को अपने वश में रखें. ( ४६ ) अग्ने त्वं नो अन्तम ऽ उत त्राता शिवो भवा वरूथ्य:. वसुरग्निर्वसुश्रवा ऽ अच्छा नक्षि द्युमत्तम १७ रयिं दा:. तं त्वा शोचिष्ठ दीदिव: सुम्नाय नूनमीमहे सखिभ्य:.. (४७) हे अग्नि! आप अन्यतम, त्राता व कल्याणकारी हैं. हे अग्नि! आप हितैषी हैं. आप हिंसकों व आततायियों से हमारी रक्षा करें. आप प्रख्यात हैं. हमारी रक्षा करें. आप धनवान हैं. हमारी रक्षा करें. आप प्रकाशवान हैं. हमारी रक्षा करें. आप स्वर्गलोक को भी प्रकाशित करते हैं. आप हमें मित्रों सहित धन और वैभव दीजिए. हम अच्छे मन से आप के लिए प्रार्थना करते हैं. ( ४७ ) यजुर्वेद - ३२१