यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 333, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध सत्ताईसवां अध्याय अभी षु णः सखीनामविता जरितॄणाम्. शतं भवास्यूतये.. (४१) हे इंद्र देव! आप हमारे मित्र जैसे हैं. आप हम लोगों की रक्षा के लिए सैकड़ों यत्न करते हैं. ( ४१ ) यज्ञा यज्ञा वो अग्नये गिरा गिरा च दक्षसे. प्र प्र वयममृतं जातवेदसं प्रियं मित्रं न श १७ सिषम्.. (४२) हर यज्ञ में अग्नि की स्तोत्रों से उपासना की जाती है. आप अमर, सर्वज्ञ, हमारे प्रिय व मित्र हैं. आप प्रशंसित हैं. ( ४२ ) पाहि नो अग्न ऽ एकया पाहुत द्वितीयया. पाहि गीर्भिस्तिसृभिरूर्जां पते पाहि चतसृभिर्वसो.. (४३) हे अग्नि! आप हमारी रक्षा कीजिए. हम एक स्तुति करते हैं. आप हमारी रक्षा कीजिए. हम दो प्रार्थनाओं से उपासना करते हैं. आप हमारी रक्षा कीजिए. हम तीन प्रार्थनाओं से आप की उपासना करते हैं. आप हमारी रक्षा कीजिए. हम चार प्रार्थनाओं से आप की उपासना करते हैं. आप हमारी रक्षा कीजिए. ( ४३ ) ऊर्जो नपात १७ स हिनायमस्मयुर्दाशेम हव्यदातये. भुवद्वाजेष्वविता भुवद्वृध ऽ उत त्राता तनूनाम्.. (४४) अग्नि ऊर्जस्वी हैं. हवि देने के लिए उन का आह्वान करते हैं. वे हमारे तन की रक्षा करते हैं और हमारी मनोकामना पूरी करते हैं. ( ४४ ) संवत्सरोसि परिवत्सरोसीदावत्सरोसीद्वत्सरो ऽ सि वत्सरोसि. उषसस्ते कल्पन्तामहोरात्रास्ते कल्पन्तामर्धमासास्ते कल्पन्तां मासास्ते कल्पन्तामृतवस्ते कल्पन्ता १७ संवत्सरस्ते कल्पताम्. प्रेत्या ऽ एत्यै सं चाञ्च प्र च सारय. सुपर्णचिदसि तया देवतयाङ्गिरस्वद् ध्रुवः सीद.. (४५) हे अग्नि! आप संवत्सर, परिवत्सर, इद्वत्सर व वत्सर हैं. उषा आप की है. दिनरात आप के हैं. आधा मास ( पक्ष ) आप का है. माह आप के हैं. वर्ष आप के हैं. कल्पांत संवत्सर आदि का आप समुचित विस्तार करते हैं. आप आइए. आप इन सब को संवारिए. आप चित्त की प्राणवायु जैसे हैं. आप ध्रुव ( स्थिर ) हो कर विराजिए. आप हमारी आहुति अंगीकार कीजिए और देवताओं से अंगीकार कराइए. ( ४५ ) यजुर्वेद - ३३३