भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 334, कुल 421 में से

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पृष्ठ 334

अठ्ठाईसवां अध्याय होता यक्षत्समिधेन्द्रमिडस्पदे नाभा पृथिव्या ऽ अधि. दिवो वर्ष्मन्त्समिध्यत ऽ ओजिष्ठश्चर्षणीसहां वेत्वाज्यस्य होतर्यज.. (१) होता ( पुरोहित ) समिधा से इंद्र देव के लिए यज्ञ करते हैं. यज्ञ पृथ्वी और अंतरिक्ष की नाभि है. स्वर्गलोक में समिधा चमक रही है. इंद्र देव ओजस्वी और विजेता हैं. यजमान से अनुरोध है कि वह उन के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. उन से अनुरोध है कि वे हवि ग्रहण करने की कृपा करें. ( १ ) होता यक्षत्तनूनपातमूर्तिभिर्जेतारमपराजितम्. इन्द्रं देव २४ स्वर्विदं पथिभिर्मधुमत्तमैर्नराश २४ सेन तेजसा वेत्वाज्यस्य होतर्यज.. ( २ ) इंद्र देव तेजस्वी, शरीर के रक्षक, अपने रक्षा साधनों से जीतने वाले और कभी नहीं हारने वाले हैं. होता उन के प्रति प्रसन्नतादायी आहुतियों से यज्ञ करते हैं. वे आत्मज्ञाता हैं. वे मधुर हवि ग्रहण करने की कृपा करें. होता उन के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. ( २ ) होता यक्षदिडाभिरिन्द्रमीडितमाजुह्वानममर्त्यम्. देवो देवैः सवीर्यो वज्रहस्तः पुरन्दरो वेत्वाज्यस्य होतर्यज.. ( ३ ) इंद्र देव अमर, उपासना के योग्य है. वे देवताओं के सर्वेसर्वा और उन के हाथ में वज्र हैं. वे शत्रुओं के नगर नष्ट करने वाले हैं. होता उन के लिए मधुर प्रार्थनाओं से यज्ञ करने की कृपा करें. वे हवि द्वारा आनंदित होने की कृपा करें. ( ३ ) होता यक्षद्बर्हिषीन्द्रं निष्षद्वरं वृषभं नर्यापसम्. वसुभी रुद्रैरादित्यैः सयुग्भिर्बर्हिरासदद्वेत्वाज्यस्य होतर्यज.. (४) इंद्र देव धनवर्षक, यजमानों का हित चाहने वाले व बलवान हैं. होता कुश के आसन पर विराज कर उन के लिए यज्ञ करते हैं. वे वसु, रुद्र, आदित्य और अपने साथ के अन्य देवों के साथ कुश के आसन पर बैठ कर हवि ग्रहण करने की कृपा करें. होता उन के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. ( ४ ) ३३४ - यजुर्वेद