भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 340, कुल 421 में से

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पृष्ठ 340

उत्तरार्ध अठ्ठाईसवां अध्याय होता यक्षद्व्यचस्वतीः सुप्रायणा ऽ ऋतावृधो द्वारो देवीर्हिरण्ययीर्ब्रह्माणमिन्द्रं वयोधसम्. पङ्क्तिं छन्द ऽ इहेन्द्रियं तुर्यवाहं गां वयो दधद्व्यन्त्वाज्यस्य होतर्यज.. (२८) होता इंद्र देव के लिए यज्ञ करते हैं. वे तुर्यवाट्, वाहक ( स्वेदज, अंडज, उद्भिज एवं जरायुज चारों योनियों ), आयुधारी, ब्रह्मज्ञानी, सुनहरे द्वार जैसे यज्ञ की वेदी वाले व सुगम हैं. होता उन के लिए पंक्ति छंद से स्तुति व इंद्रिय शक्ति से उन की उपासना करते हैं. प्रयाज एवं इंद्र देव आहुति स्वीकार करने की कृपा करें. यजमान गण उन के लिए यज्ञ करें. ( २८ ) होता यक्षत्सुपेशसा सुशिल्पे बृहती उभे नक्तोषासा न दर्शते विश्वमिन्द्रं वयोधसम्. त्रिष्टुभं छन्द ऽ इहेन्द्रियं पष्ठवाहं गां वयो दधद्वीतामाज्यस्य होतर्यज.. (२९) होता ने इंद्र देव के लिए यज्ञ किया. वे आयुधारी हैं. उषा और रात्रि विशाल हैं. वे अच्छे शिल्प वाली और सर्वव्यापक हैं. दोनों देवियां हवि स्वीकारने की कृपा करें. हम त्रिष्टुप् छंद से इन की व इंद्रिय शक्ति से उन की उपासना करते हैं. हम उन के लिए भार सहने वाली पृष्टवाही गौएं धारण करते हैं. प्रयाज एवं इंद्र देव हवि स्वीकारें यजमान उन के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. ( २९ ) होता यक्षत्प्रचेतसा देवानामूत्तमं यशो होतारा दैव्या कवी सयुजेन्द्रं वयोधसम्. जगतीं छन्द ऽ इन्द्रियमनड्वाहं गां वयो दधद्वीतामाज्यस्य होतर्यज.. (३०) होता इंद्र देव और सहयोगी देवों के लिए यज्ञ करते हैं. इंद्र देव दिव्य, यशस्वी, कवि व आयुधारी हैं. यजमान जगती छंद से उन की उपासना करते हैं. इंद्रिय शक्ति से उन की उपासना करते हैं. प्रयाज सहित इंद्र देव हवि स्वीकारें. यजमान उन के लिए यज्ञ करें. ( ३० ) होता यक्षत्पेशस्वतीस्तिस्रो देवीर्हिरण्ययीर्भारतीर्बृहतीर्महीः पतिमिन्द्रं वयोधसम्. विराजं छन्द ऽ इहेन्द्रियं धेनुं गां न वयो दधद्व्यन्त्वाज्यस्य होतर्यज.. (३१) होता ने इंद्र देव के लिए यज्ञ किया. पालक इंद्र देव इड़ा, सरस्वती व भारती देवी के साथ हैं. ये देवियां आयुधारी, स्वर्णमयी, विशाल और महिमामयी हैं. हम विराज छंद से इंद्र देव के लिए उपासना करते हैं. हम इंद्रिय शक्ति से इंद्र देव की उपासना करते हैं. हम दुधारू गाएं उन के लिए धारण करते हैं. हम यजमान उन के लिए आहुति भेंट करें. यजमान उन के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. ( ३१ ) होता यक्षत्सुरेतसं त्वष्टारं पुष्टिवर्धन ६४ रूपाणि बिभ्रतं पृथक् पुष्टिमिन्द्रं वयोधसम्. द्विपदं छन्द ऽ इन्द्रियमुक्षाणं गां न वयो दधद्वेत्वाज्यस्य होतर्यज.. (३२) होता ने त्वष्टा और इंद्र देव के लिए यज्ञ किया. दोनों देव पोषकता बढ़ाने वाले हैं, वे रूपधारी व प्राणियों के पालनहार हैं. हम द्विपदा छंद में रची प्रार्थना से उन की उपासना करते हैं. हम इंद्रिय शक्ति से उन के लिए उपासना करते हैं. यजमान ३४० - यजुर्वेद