भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 339, कुल 421 में से

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पृष्ठ 339

उत्तरार्ध अट्ठाईसवां अध्याय अग्नि ने आज होता का वरण किया. पचने योग्य वस्तु व पुरोडाश को पकाया. इंद्र देव के लिए बकरी को बांधा. आज वनस्पति देव ने बकरी के दूध से इंद्र देव की बढ़ोतरी की. आज पुरोडाश पका कर उस से उन की बढ़ोतरी की. हे ऋषि गणो! आप भी ऐसा करने की कृपा कीजिए. ( २३ ) होता यक्षत्समिधानं महद्यशः सुसमिद्धं वरेण्यमग्निमिन्द्रं वयोधसम्. गायत्रीं छन्द ऽ इन्द्रियं त्र्यविं गां वयो दधद्वेत्वाज्यस्य होतर्यज.. ( २४ ) होता ने अग्नि और इंद्र देव के लिए यज्ञ किया. दोनों देव महान् यशस्वी, श्रेष्ठ समिधा से युक्त, वरेण्य व आयुधारी हैं. होता गायत्री छंद और इंद्रिय शक्ति के द्वारा उन के लिए आहुति भेंट करते हैं. होता ऊर्जा प्रकाश और उन की किरणों से उन के लिए आहुति भेंट करते हैं. ( २४ ) होता यक्षत्तनूनपातमृद्धिदं यं गर्भमदितिर्दधे शुचिमिन्द्रं वयोधसम्. उष्णिहं छन्द ऽ इन्द्रियं दित्यवाहं गां वयो दधद्वेत्वाज्यस्य होतर्यज.. ( २५) होता ने इंद्र देव के लिए यज्ञ किया. उन को अदिति देवी ने गर्भ में धारा. वे आयुधारी हैं. होता उष्णिक् छंद में इंद्र देव की स्तुति करते हैं. होता इंद्रियशक्ति से उन को हवि प्रदान करते हैं. वे दित्यवाट् गौ ( यज्ञीय प्रक्रिया संचालित करने वाली किरणें ) धारने वाले हैं. यजमान उन के लिए आहुति समर्पित करते हैं. प्रयाज देव के साथ वे हमारी हवि ग्रहण करें. ( २५ ) होता यक्षदीडेन्यमीडितं वृत्रहन्तममिडाभिरीड्य २४ सहः सोममिन्द्रं वयोधसम्. अनुष्टुभं छन्द ऽ इन्द्रियं पञ्चाविं गां वयो दधद्वेत्वाज्यस्य होतर्यज.. ( २६ ) होता इंद्र देव के लिए यज्ञ करते हैं. वे वृत्रासुरनाशक व सुखदाता हैं. सोम के साथ आनंददाता व आयुधारी हैं. हम अपनी प्रार्थनाओं के द्वारा बारंबार उन की उपासना करते हैं. हम इंद्र देव के लिए यज्ञ करते हैं. हम अनुष्टुप् छंद में उन की स्तुति करते हैं. इंद्रिय शक्ति के द्वारा हम पंचावि गायों ( पंचभूतों में व्याप्त किरणें ) से उन को आहुति भेंट करते हैं. प्रयाज देव इंद्रादि देवता के साथ आहुति ग्रहण करने की कृपा करें. ( २६ ) होता यक्षत्सुबर्हिषं पूषण्वन्तममर्त्य २४ सीदन्तं बर्हिषि प्रियेमृतेन्द्रं वयोधसम्. बृहतीं छन्द ऽ इन्द्रियं त्रिवत्सं गां वयो दधद्वेत्वाज्यस्य होतर्यज.. ( २७) होता इंद्र देव के लिए यज्ञ करते हैं. वे कुश के आसन पर विराजते हैं. वे पोषकता से युक्त, अमर हैं, प्रिय हैं, अमृतराज व आयुधारी हैं. हम बृहती छंद में उन की स्तुति करते हैं. हम इंद्रिय शक्ति से उन की स्तुति करते हैं. हम तीन बछड़ों वाली गाय से उन की स्तुति करते हैं. प्रयाज देव इंद्र आदि देव सहित हवि ग्रहण करने की कृपा करें. यजमान आहुति भेंट करने की कृपा करें. ( २७ ) यजुर्वेद - ३३९