यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 342, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध अट्ठाईसवां अध्याय उषा देवी और रात्रि देवी इंद्र देव की आयुवृद्धि व उन की बढ़ोतरी करने की कृपा करें. हम उन की अनुष्टुप् छंद में उपासना करते हैं. देवियों ने इंद्र देव में बल व आयु की स्थापना की. देव हमारे लिए धन धारते हैं. देव हमें धन प्रदान करें. हे होता! आप उन के लिए यज्ञ करने की कृपा कीजिए. ( ३७ ) देवी जोष्ट्री वसुधिती देवमिन्द्रं वयोधसं देवी देवमवर्धताम्. बृहत्या छन्दसेन्द्रिय १४ श्रोत्रमिन्द्रे वयो दधद्दुसुवने वसुधेयस्य वीतां यज.. ( ३८) देवी जोशीली, धनधारिणी और इंद्र देव की आयु बढ़ाती हैं. हम देवताओं की उपासना करते हैं. हम अपनी कर्णशक्ति व अपनी आयुशक्ति इंद्र देव में लगाते हैं. वे हमारे लिए धन धारते हैं. वे हमें धन प्रदान करें. उन के लिए यजमान यज्ञ करें. ( ३८ ) देवी ऊर्जाहुती दुघे सुदुघे पयसेन्द्रं वयोधसं देवी देवमवर्धताम्. पङ्क्त्या छन्दसेन्द्रिय १४ शुक्लमन्द्रे वयो दधद्दुसुवने वसुधेयस्य वीतां यज.. (३९) देवी ऊर्जावती हैं. इंद्र देव के लिए अच्छी तरह दूध का दोहन करती हैं. देवी इंद्र देव के लिए आयु धारती और उन की बढ़ोतरी करती हैं. हम पंक्ति छंद में उन की उपासना करते हैं. हम अपना पराक्रम उन को देते हैं. हम अपनी आयु उन के लिए धारते हैं. वे हमारे लिए धन धारते हैं. यजमान उन के लिए हवन करने की कृपा करें. ( ३९ ) देवा दैव्या होतारा देवमिन्द्रं वयोधसं देवौ देवमवर्धताम्. त्रिष्टुभा छन्दसेन्द्रियं त्विषिमिन्द्रे वयो दधद्दुसुवने वसुधेयस्य वीतां यज.. (४०) दिव्य होता इंद्र देव के लिए यज्ञ करते हैं. वे उन के लिए आयु धारण करते हैं. देवताओं ने उन की बढ़ोतरी की. हम त्रिष्टुप् छंद से उन की उपासना करते हैं. वे हमारे लिए धन धारते हैं. वे हमें धन प्रदान करें. यजमान उन के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. ( ४० ) देवीस्तिस्रस्तिस्रो देवीर्वयोधसं पतिमिन्द्रमवर्धयन्. जगत्या छन्दसेन्द्रिय १४ शूषमिन्द्रे वयो दधद्दुसुवने वसुधेयस्य व्यन्तु यज.. (४१) तीनों देवियां इंद्र देव के लिए आयु धारती हैं. वे पालक इंद्र देव की बढ़ोतरी करती हैं. हम जगती छंद से उन की उपासना करते हैं. हम अपनी आयु व अपनी इंद्रिय शक्ति उन को अर्पित करते हैं. यजमान उन के लिए यज्ञ करें. ( ४१ ) देवो नराश १४ सो देवमिन्द्रं वयोधसं देवो देवमवर्धयत्. विराजा छन्दसेन्द्रिय १४ रूपमिन्द्रे वयो दधद्दुसुवने वसुधेयस्य वेतु यज.. (४२) यज्ञ देव ने इंद्र देव की बहुविध प्रशंसा की. वे उन के लिए आयु धारते हैं. वह ३४२ - यजुर्वेद