भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 343, कुल 421 में से

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पृष्ठ 343

उत्तरार्ध अट्ठाईसवां अध्याय उन की बढ़ोतरी करते हैं. हम विराज छंद से उन की उपासना करते हैं. हम अपना रूप व आयु उन को अर्पित करते हैं. वे धन धारी हैं. वे हमें धन प्रदान करें. यजमान उन के लिए यज्ञ करें. ( ४२ ) देवो वनस्पतिर्देवमिन्द्रं वयोधसं देवो देवमवर्धयत्. द्विपदा छन्दसेन्द्रियं भगमिन्द्रे वयो दधद्वसुवने वसुधेयस्य वेतु यज.. (४३) वनस्पति देव इंद्र देव के लिए आयु धारते हैं. वनस्पति देव उन की बढ़ोतरी करते हैं. हम द्विपद छंद से उन की स्तुति करते हैं. हम अपना सौभाग्य व अपनी आय उन को सौंपते हैं. वे धनधारी हैं. वे हमें धन प्रदान करें. यजमान उन के लिए यज्ञ करें. ( ४३ ) देवं बर्हिर्वारितीनां देवमिन्द्रं वयोधसं देवं देवमवर्धयत्. ककुभा छन्दसेन्द्रियं यश ऽ इन्द्रे वयो दधद्वसुवने वसुधेयस्य वेतु यज.. (४४) इंद्र देव कुश के आसन पर विराजते हैं. बर्हिदेव उन के लिए आयु धारते व उन की बढ़ोतरी करते हैं. हम ककुप् छंद से उन की स्तुति करते हैं. हम अपना यश उन को सौंपते हैं. हम अपनी आयु उन को सौंपते हैं. वे धनधारी हमें धन प्रदान करें. यजमान उन के लिए यज्ञ करें. ( ४४ ) देवो अग्निः स्विष्टकृद्देवमिन्द्रं वयोधसं देवो देवमवर्धयत्. अतिच्छन्दसा छन्दसेन्द्रियं क्षत्रमिन्द्रे वयो दधद्वसुवने वसुधेयस्य वेतु यज.. (४५) अग्नि इंद्र देव की वीरता और आयु की बढ़ोतरी करते हैं. हम अतिच्छंद से उन की उपासना करते हैं. हम अपनी वीरता व अपनी आयु उन को सौंपते हैं. वे धनधारी हैं. वे हमें जीवन प्रदान करें. यजमान उन के लिए यज्ञ करें. ( ४५ ) अग्निमद्य होतारमवृणीतायं यजमानः पचन्पक्तीः पचन्पुरोडाशं बध्नन्निन्द्राय वयोधसे छागम्. सूपस्था ऽ अद्य देवो वनस्पतिरभवदिन्द्राय वयोधसे छागेन. अद्यत्तं मेदस्तः प्रतिपचताग्रभीदवीवृधत्पुरोडाशेन. त्वामद्य ऋषे.. (४६) अग्नि ने आज होता को वरण किया! पचने योग्य वस्तु और पुरोडाश को पकाया. इंद्र देव के लिए बकरी को बांधा. वनस्पति देव ने बकरी के दूध से व पुरोडाश पका कर उन की बढ़ोतरी की. हे ऋषि गणो! आप भी ऐसा करने की कृपा कीजिए. ( ४६ ) यजुर्वेद - ३४३