भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 344, कुल 421 में से

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पृष्ठ 344

उनतीसवां अध्याय समिद्धो अञ्जन् कृदरं मतीनां घृतमग्ने मधुमत्पिन्वमानः. वाजी वहन् वाजिनं जातवेदो देवानां वक्षि प्रियमा सधस्थम्.. (१) हे अग्नि! आप समिधा को प्रज्वलित करें. आप मतिमान के हृदय के प्रिय भावों को भी देवों तक पहुंचाइए. आप मधुर घी का सेवन कीजिए. आप सर्वज्ञ हैं. आप हवि वहन कर के बलशाली देवता को उसे भेंट कीजिए. ( १ ) घृतेनाञ्जन्तसं पथो देवयानान् प्रजानन् वाज्यप्येतु देवान्. अनु त्वा सप्ते प्रदिशः सचन्ता ष्ठं स्वधामस्मै यजमानाय धेहि.. (२) हे अग्नि! आप देवताओं का पथ घी से अभिषिंचित व उन्हें हवि से आप्यायित ( प्रसन्न ) कर दीजिए. आप सातों दिशाएं सींच दीजिए. आप यजमान के लिए स्वधा धारिए. ( २ ) ईड्यश्चासि वन्द्यश्च वाजिन्नाशुश्चासि मेध्यश्च सप्ते. अग्निष्ट्वा देवैर्वसुभिः सजोषाः प्रीतं वहिं वहतु जातवेदाः.. (३) हे अग्नि! आप सर्वज्ञ हैं. आप वसुओं से प्रेम रखते हैं. आप प्रीतिपूर्वक अग्नि को ले जाने व अन्न को पवित्र कीजिए. आप वंदनीय हैं. ( ३ ) स्तीर्णं बर्हिः सुष्टरीमा जुषाणोरु पृथु प्रथमानं पृथिव्याम्. देवेभिर्युक्तमदितिः सजोषाः स्योनं कृण्वाना सुविते दधातु.. (४) देवताओं से युक्त अदिति देवी प्रसन्नता सहित सविता देव को धारण करें. अदिति देवी का कुश का आसन विस्तृत है. अदिति देवी सुखदायी हैं. अदिति देवी पृथ्वी पर अपनी विशालता से फैली हुई हैं. ( ४ ) एता ऽ उ वः सुभगा विश्वरूपा वि पक्षोभिः श्रयमाणा ऽ उदातैः. ऋष्वाः सतीः कवषः शुम्भमाना द्वारो देवीः सुप्रायणा भवन्तु.. (५) देवी के द्वार सौभाग्यदाता, बहुत स्वरूप व पंख के आकार वाले हैं. खोलते और बंद करते समय वे उदात्त ध्वनि करते हैं. ऋषि, सती और कवियों द्वारा खोले जाने पर जाने में सुकर हों. ( ५ ) ३४४ - यजुर्वेद