यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 348, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध उनतीसवां अध्याय उप प्रागात्परमं यत्सधस्थमर्वाँ २ अच्छा पितरं मातरं च. अद्या देवाञ्जुष्टतमो हि गम्या ऽ अथा शास्ते दाशुषे वार्याणि.. ( २४) हे अर्वन्! आप ऊपर परम स्थान की ओर गमन कीजिए. आप मातापिता से मिलिए. यजमान देवताओं से जुड़े देवगण हमें अपार वैभव प्रदान करने की कृपा करें. ( २४ ) समिद्धो अद्य मनुषो दुरोणे देवो देवान् यजसि जातवेदः. आ च वह मित्रमहश्चिकित्वान्त्वं दूतः कविरसि प्रचेताः.. ( २५) हे अग्नि! आप समिधा युक्त और सर्वज्ञ हैं. आप मनुष्यों के यज्ञ में देवताओं को आमंत्रित करने की कृपा कीजिए. हम आप का आह्वान करते हैं. आप हमारे मित्र, चेतनासंपन्न, कवि व देवताओं के दूत हैं. ( २५ ) तनूनपात्पथ ऽ ऋतस्य यानान्मध्वा समञ्जन्त्स्वदया सुजिह्व. मन्मानि धीभिरुत यज्ञमृन्धन् देवत्रा च कृणुह्यध्वरं नः.. ( २६) हे अग्नि! आप तन के रक्षक हैं. आप ऋत को अच्छी जिह्वा से सींचते हैं. आप बुद्धि और मनन से यज्ञ की बढ़ोतरी करते हैं. आप हमारे यज्ञ को देवताओं तक पहुंचाने की कृपा कीजिए. ( २६ ) नराश ँष सस्य महिमानमेषामुप स्तोषाम यजतस्य यज्ञैः. ये सुक्रतवः शुचयो धियन्धाः स्वदन्ति देवा ऽ उभयानि हव्या.. ( २७) हे अग्नि! आप प्रशंसित हैं. हम आप की महिमा गाते हैं. आप श्रेष्ठ यज्ञ कर्म वाले, पवित्र, बुद्धिमान हैं. हम दोनों हवियों से आप का गुणगान करते हैं. ( २७ ) आजुह्वान ऽ ईड्यो वन्द्यश्चा याह्यग्ने वसुभिः सजोषाः. त्वं देवानामसि यह्व होता स एनान्यक्षीषितो यजीयान्.. ( २८) हे अग्नि! आप देवताओं को बुलाने वाले, प्रार्थनीय, वंदनीय व वसुओं जैसे स्नेहशील हैं. आप आइए. आप देवताओं के होता हैं. आप देवताओं के लिए यज्ञ करने की कृपा कीजिए. ( २८ ) प्राचीनं बर्हिः प्रदिशा पृथिव्या वस्तोरस्या वृज्यते अग्रे अह्नाम्. व्यु प्रथते वितरं वरीयो देवेभ्यो अदितये स्योनम्.. ( २९) ये कुशाएं प्राचीन हैं. पृथिवी की प्रदिशाओं में फैली हुई हैं. अदिति देवता के विराजमान होने के लिए इन कुशाओं को फैलाया ( बिछाया ) जाता है. कुशाएं बिछा कर सुख से बैठा जा सकता है. ( २९ ) ३४८ - यजुर्वेद