यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 356, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध तीसवां अध्याय अंग चालन हेतु सूत, गीत के लिए नट, धर्म के लिए सभासद, नेतृत्व हेतु क्षमतावान, नरमाई हेतु मधुरभाषी, मनोविनोद हेतु स्वांग करने वाला उपयुक्त रहता है. आनंद प्राप्ति के लिए स्त्रियों के प्रति सख्य भाव, प्रबल मद ( से उन्मत्त ) के लिए कुमारी ( वीरांगना ) पुत्र, मेधावी के लिए रथकार और धैर्य के लिए गढ़िया ( गढ़ाई करने वाला ) उपयुक्त है. ( ६ ) तपसे कौलालं मायायै कर्मार १४ रूपाय मणिकार १४ शुभे वप १४ शरव्याया ऽ इषुकार १४ हेत्यै धनुष्कारं कर्मणे ज्याकारं दिष्टाय रज्जुसर्जं मृत्यवे मृगयु मन्तकाय श्वनिनम्.. ( ७) तपाने के लिए कुम्हार, माया के लिए कारीगर, रूप के लिए मणिकार, शुभ कार्य के लिए काटछांट में प्रवीण, लक्ष्यभेदी बाण के लिए इषुकार, आयुध के लिए धनुष्कार, कर्म के लिए ज्याकार ( डोरी बनाने वाले ), आज्ञा देने हेतु रज्जुसर्जक ( रस्सी बनाने वाले ), मृत्यु के लिए कसाई, यम के लिए कुत्ते पालक की नियुक्ति की जानी चाहिए. ( ७ ) नदीभ्यः पौञ्जिष्ठ मृक्षीकाभ्यो नैषादं पुरुषव्याघ्राय दुर्मदं गन्धर्वाप्सरोभ्यो व्रात्यं प्रयुग्भ्य ऽ उन्मत्त १४ सर्पदेवजनेभ्योप्रतिपदमयेभ्यः कितव मीर्यताया ऽ अकितवं पिशाचेभ्यो विदलकारीं यातुधानेभ्यः कण्टकीकारीम्.. ( ८) नदियों के लिए नाविक, रीछ आदि के लिए वनचरों ( निषाद ), शेर की तरह दुर्दम्य पुरुष के लिए प्रबल प्रतापी को, गंधर्व और अप्सराओं के लिए असंस्कारित, शोधार्थी हेतु उन्मत्त को, सांप, मनुष्य और देवों के लिए ज्ञानी को, जुए के लिए जुए में कुशल व्यक्ति को, उन्नति के लिए छलकपट मुक्त को पिशाचों के लिए हृदय विदीर्ण करने वाले राक्षस जैसे लुटेरों के लिए रास्ते में कांटे ( रोड़े ) अटकाने वालों को नियुक्त किया जाना चाहिए. ( ८ ) सन्ध्ये जारं गेहायोपपति मार्त्यै परिवित्तं निर्ऋत्यै परिविविदान मराध्या ऽ एदिधिषुः पतिं निष्कृत्यै पेशस्कारी १४ संज्ञानाय स्मरकारीं प्रकामोद्यायोपसदं वर्णायनुरुधं बलायोपदाम्.. ( ९) संधि के लिए मित्र को, घर के लिए उपमुखिया को, गरीबी के लिए धनी को, आपातकाल में साधन जुटाने में दक्ष को, सिद्धि के लिए हित को सर्वोपरि मानने वाले, संस्कार हेतु शुद्धिकरण में कुशल को, ज्ञानप्राप्ति हेतु कार्य कुशल को, अचानक काम आ पड़ने पर पास वाले व्यक्ति को, स्वीकार कराने के लिए आग्रह में दक्ष को तथा बल हेतु सहारा देने वाले को नियुक्त करना चाहिए. ( ९ ) उत्सादेभ्यः कुब्जं प्रमुदे वामनं द्वाभ्यः स्राम १४ स्वप्नायान्धमधर्माय बधिरं पवित्राय भिषजं प्रज्ञानाय नक्षत्रदर्श माशिक्षायै प्रश्निन मुपशिक्षायै ऽ अभिप्रश्निनं मर्यादायै प्रश्नविवाकम्.. ( १०) ३५६ - यजुर्वेद