भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 361

इकतीसवां अध्याय सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्. स भूमि १४ सर्वत स्पृत्वात्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्.. ( १ ) परम पुरुष हजारों सिर वाला, हजारों नेत्रों वाला व हजारों पैर वाला है. वह परम पुरुष सारे ब्रह्मांड को घेर कर भी दस अंगुली ऊपर अधिष्ठित है. ( १ ) पुरुष ऽ एवेद १४ सर्वं यद्भूतं यच्च भव्यम्. उतामृतत्वस्येशानो यदन्नेनातिरोहति.. ( २ ) जो हो चुका है और जो होने वाला है वह परम पुरुष ही है. वह अमरता का स्वामी है. जो अन्न से बढ़ोतरी पाते हैं, उन के भी वही स्वामी हैं. ( २ ) एतावानस्य महिमातो ज्यायाँश्च पूरुषः. पादोस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि.. ( ३ ) परम पुरुष अत्यंत महिमावान है. इस के चरणों में सभी प्राणी हैं. इस का एक भाग पृथ्वी पर है, जिस में सब प्राणी हैं और तीन भाग स्वर्गलोक में स्थित हैं. ( ३ ) त्रिपादूर्ध्व ऽ उदौत्पुरुषः पादोस्येहाभवत् पुनः. ततो विष्वङ् व्यक्रामत्साशनानशने अभि.. ( ४ ) परम पुरुष के तीन पैर ऊर्ध्वलोक में समाए हुए हैं. एक भाग में इहलोक समाहित है. जड़, चेतन सभी इस के इस पैर में समाहित हैं. ( ४ ) ततो विराजडजायत विराजो अधि पूरुषः. स जातो अत्यरिच्यत पश्चाद्भूमिमथो पुरः.. ( ५ ) उस परम पुरुष से विराट् उपजा. विराट् से सृष्टि उपजी. उस से भूमि पैदा हुई फिर जीव पैदा हुए. ( ५ ) तस्माद्यज्ञात्सर्वहुतः सम्भृतं पृषदाज्यम्. पशूँस्ताँश्चक्रे वायव्यानारण्या ग्राम्याश्च ये.. ( ६ ) यजुर्वेद - ३६१