भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 362, कुल 421 में से

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पृष्ठ 362

उत्तरार्ध इकतीसवां अध्याय उस विराट् के यज्ञ से घी प्राप्त हुआ, जिस से सब को आहुति दी जाती है. उसी विराट् से पक्षी, पशु, गांव के जीव, जानवर उपजे. ( ६ ) तस्माद्यज्ञात् सर्वहुत ऽ ऋचः सामानि जज्ञिरे. छन्दा १५ं सि जज्ञिरे तस्माद्यजुस्तस्मादजायत.. (७) उस विराट् यज्ञ रूपी पुरुष से ऋग्वेद प्रकटा. उसी से सामवेद प्रकटा. उसी से यजुर्वेद प्रकट हुआ. उसी से अथर्ववेद का प्रादुर्भाव हुआ. ( ७ ) तस्मादश्वा ऽ अजायन्त ये के चोभयादतः. गावो ह जज्ञिरे तस्मात्तस्माज्जाता ऽ अजावयः... (८) उसी विराट् यज्ञ रूपी पुरुष से दोनों ओर दांतों वाले जीव उपजे. उसी से घोड़े उपजे. उसी से बकरियां उपजीं. उसी से भेड़ आदि उपजे. ( ८ ) तं यज्ञं बर्हिषि प्रौक्षन् पुरुषं जातमग्रतः. तेन देवा ऽ अयजन्त साध्या ऽ ऋषयश्च ये.. (९) सब से पहले यज्ञ से बाहर आए उस पुरुष को पूजा. उसी से देवताओं, ऋषियों और साधकों ने यज्ञ को उपजाया. ( ९ ) यत्पुरुषं व्यदधुः कतिधा व्यकल्पयन्. मुखं किमस्यासीत् किं बाहू किमूरू पादा ऽ उच्येते.. (१०) संकल्प से प्रकटे विराट् पुरुष का ज्ञानीजन भांतिभांति से वर्णन करते हैं. उस का मुख क्या है ? बाहु क्या है ? जांघ कौन सी है ? पांव क्या कहे जाते हैं. ( १० ) ब्राह्मणोस्य मुखमासीद्बाहू राजन्यः कृतः. ऊरू तदस्य यद्वैश्यः पद्भ्या १५ं शूद्रो अजायत.. (११) ब्राह्मण विराट् पुरुष का मुंह हुए. क्षत्रिय उस की भुजाएं हुए. वैश्य उस की जंघाएं हुईं. शूद्र उस के पैर हुए. ( ११ ) चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यो अजायतः. श्रोत्राद्वायुश्च प्राणश्च मुखादग्निरजायत.. (१२) विराट् पुरुष के मन से चंद्रमा, आंखों से सूर्य, कान से वायु और मुख से अग्नि उत्पन्न हुई. ( १२ ) नाभ्या ऽ आसीदन्तरिक्ष १५ं शीर्ष्णो द्यौः समवर्त्तत. पद्भ्यां भूमिर्दिशः श्रोत्रात्तथा लोकाँ २ अकल्पयन्.. (१३) परम पुरुष की नाभि से अंतरिक्ष प्रकट हुआ. परम पुरुष के सिर से स्वर्गलोक ३६२ - यजुर्वेद