यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 364, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध इकतीसवां अध्याय होते हैं. उन्हीं में सारे लोक स्थित हैं. धीर पुरुष उस के कारण चारों ओर देखते हैं. ( १९) यो देवेभ्य ऽ आतपति यो देवानां पुरोहितः. पूर्वो यो देवेभ्यो जातो नमो रुचाय ब्राह्मये.. (२०) जो सभी देवताओं में सब से पहले प्रकटे, जो तेज संपन्न हैं, उन ब्रह्म को नमस्कार है. आप देवताओं के पुरोहित हैं. आप देवताओं को प्रकाशित करने वाले हैं. ( २० ) रुचं ब्राह्मं जनयन्तो देवा ऽ अग्रे तदब्रुवन्. यस्त्वैवं ब्राह्मणो विद्यात्तस्य देवा ऽ असन् वशे.. (२१) जो देवताओं में अग्रणी हैं, जिन के बारे में यह कहा गया है कि वे प्रकाशमय ब्रह्म को प्रकटातें हैं, उस परम पुरुष को ब्रह्मज्ञानी जानते हैं. उस परम पुरुष के वश में सारे देवता रहते हैं. ( २१ ) श्रीश्च ते लक्ष्मीश्च पत्न्यावहोरात्रे पार्श्वे नक्षत्राणि रूपमश्विनौ व्यात्तम्. इष्णन्निषाणामुं म ऽ इषाण सर्वलोकं म ऽ इषाण.. (२२) हे परम पुरुष! श्री और लक्ष्मी आप की पत्नी हैं. दोनों भुजाएं दिन और रात हैं. नक्षत्र आप के रूप हैं. आप सब की इच्छा पूर्ति की सामर्थ्य रखते हैं. आप सभी लोकों की इच्छा पूर्ति करने की कृपा कीजिए. ( २२ ) ३६४ - यजुर्वेद