यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 390, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध चौंतीसवां अध्याय प्रातःर्जितं भगमुग्र ९४ हुवेम वयं पुत्रमदितेर्यो विधर्त्ता. आध्रश्चिद्यं मन्यमानस्तुरश्चिद्राजा चिद्यं भगं भक्षीत्याह.. ( ३५ ) हम प्रातःकाल में अदिति देव का आह्वान करते हैं. वे विजेता, सौभाग्यवान, उग्र व संसार के धारक हैं. यह कहा गया है कि धनवान, गरीब, रोगी, राजा कोई भी हो वे अभीष्ट मनोकामना सिद्धि हेतु सूर्य की उपासना ( आराधना ) करते हैं. ( ३५ ) भग प्रणेतर्भग सत्यराधो भगेमां धियमुदवा ददनः. भग प्र नो जनय गोभिरश्वैर्भग प्र नृभिर्नृवन्तः स्याम.. ( ३६ ) हे भग देव! आप हमारे पथ के प्रणेता हैं. हे भग देव! आप सत्य रूपी धन के प्रदाता हैं. हे भग देव! आप उन्नतिदायी बुद्धि के प्रदाता हैं. हे भग देव! आप हमारे लिए गाएं उत्पन्न करें. हे भग देव! आप हमारे लिए घोड़े उत्पन्न करें. हे भग देव! आप की कृपा से हम नेतृत्व करने वाली संतान वाले हो जाएं. ( ३६ ) उतेदानीं भगवन्तः स्यामोत प्रपित्व ऽ उत मध्ये अह्नाम्. उतोदिता मघवन्सूर्यस्य वयं देवाना ९४ सुमतौ स्याम.. ( ३७ ) हम सूर्य की कृपा से सद्बुद्धि वाले व धनवान हो जाएं. हम उन की कृपा से सूर्योदय में धन प्राप्त करें. हम उन की कृपा से मध्याह्न और सूर्यास्त में धन संपन्न हों. ( ३७ ) भग ऽ एव भगवाँ २ अस्तु देवास्तेन वयं भगवन्तः स्याम. तं त्वा भग सर्व ऽ इज्जोहवीति स नो भग पुर ऽ एता भवेह.. ( ३८ ) हे भग देव! आप धनवान व भाग्यवान हैं. आप की कृपा से हम यजमान भी धनवान और भाग्यवान हो जाएं. यजमान भग देव का आह्वान करते हैं. आप हमारे यहां पधार कर हमारे यज्ञ और सभी इष्ट कार्यों को सफल बनाने की कृपा कीजिए. ( ३८ ) समध्वरायोपसो नमन्त दधिक्रावेव शुचये पदाय. अर्वाचीनं वसुविदं भगं नो रथमिवाश्वा वाजिन ऽ आ वहन्तु.. ( ३९ ) हम उषाकाल में यज्ञ व नमन करते हैं. हम उषाकाल में पवित्र गतिविधियां संपन्न करते हैं. जैसे अश्ववान रथ गतिशील रहते हैं, वैसे ही भग देव हमें प्राचीन और श्रेष्ठ धन वाला बनाने की कृपा करें. ( ३९ ) अश्वावतीर्गोमतीर्न ऽ उषासो वीरवतीः सदमुच्छन्तु भद्राः. घृतं दुहाना विश्वतः प्रपीता यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः... ( ४० ) जैसे अश्वमयी वीरवती व कल्याणी उषा देवी घी व दूध देती हैं, वैसे ही प्रभात वेला हमारा कल्याण करने की कृपा करें. हमारे लिए घी व दूध दुहें. अज्ञान अंधकारमय बाधाएं सब ओर से दूर करें. आप सभी देवगण सदैव हमारा कल्याण करने की कृपा करें. ( ४० ) ३९० - यजुर्वेद