यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 419, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध चालीसवां अध्याय हम ने धीर पुरुषों से विशेष रूप से जाना है कि विद्या का प्रभाव कुछ और होता है. अविद्या का प्रभाव कुछ और होता है. ( १३ ) विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभय ᳪ सह. अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययामृतमश्नुते.. (१४) विद्या और अविद्या दोनों को ही साथसाथ समझिए. अविद्या से मृत्यु को पार किया जाता है. विद्या से अमृत तत्त्व को पाया जाता है. ( १४ ) वायुरनिलममृतमथेदं भस्मान्त ᳪ शरीरम्. ओ३म् क्रतो स्मर. क्लिबे स्मर. कृत ᳪ स्मर.. (१५) यह शरीर वायु, अमृत आदि से बना हुआ है. शरीर नाशवान है. हे यजमान! आप ओम् तथा अपनी क्षमता और किए गए कर्मों का स्मरण करो. ( १५ ) अग्ने नय सुपथा राये अस्मान्विश्वानि देव वयुनानि विद्वान्. युयोध्यस्मज्जुहुराणमेनो भूयिष्ठां ते नम ऽ उक्तिं विधेम.. (१६) हे अग्नि! आप हमें श्रेष्ठ मार्ग पर ले जाइए. आप हमें ऐसे ही मार्ग से धन दिलाइए. हे विश्व! आप विद्वान् हैं. हम बारबार आप को नमन करते हैं. हम बारबार आप से अनुरोध करते हैं. आप हमें पापों से बचाने की कृपा करें. ( १६ ) हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्. योसावादित्ये पुरुषः सोसावहम्. ॐ खं बह्म.. (१७) सत्य का मुंह स्वर्णमय पात्र से ढका हुआ है. वह जो आदित्य पुरुष है, वह मैं हूं. आकाश में ओम् रूप में ब्रह्म ही व्याप्त है. ( १७ ) ( यजुर्वेद संपूर्ण ) यजुर्वेद - ४१९