भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 53

पूर्वार्ध तीसरा अध्याय यद्ग्रामे यदर॑ण्ये॒ यत्स॒भायां॒ यदि॑न्द्रि॒ये. यदेन॑श्चकृ॒मा व॒यमि॒दं तदव॑यजामहे॒ स्वाहा॑.. (४५) जो पाप हम ने गांव, जंगल और सभा में किए हैं हम उन से मुक्त होने के लिए यज्ञ करते हैं, उन के लिए स्वाहा. जो पाप हम ने इंद्रियों से किए हैं हम उन से मुक्त होने के लिए यज्ञ करते हैं, उन के लिए स्वाहा. ( ४५ ) मो षू ण ऽ इन्द्रात्र॒ पृत्सु॑ दे॒वैरस्ति॒ हि ष्मा॑ ते शुष्मि॒न्नव॑याः. म॒हश्चि॒द्यस्य॑ मीढुषो यव्या॑ ह॒विष्म॑तो म॒रुतो॒ वन्द॑ते॒ गीः.. (४६) हे इंद्र! आप शक्तिमान और देवों का पक्ष लेने वाले हैं. आप हमारा नाश मत कीजिए. आप महान और हवि को ग्रहण करने वाले हैं. आप यज्ञ वाली हवि ग्रहण करते हैं. हम मरुद्गण की भी वाणी से वंदना करते हैं. ( ४६ ) अक्र॒न् कर्म॑ कर्म॒कृतः॒ सह॑ वा॒चा म॑यो॒भुवा. दे॒वेभ्यः॒ कर्म॑ कृ॒त्वास्तं॒ प्रेत॑ सचाभुवः.. (४७) कर्मकर्ता वाणी के साथ मंत्रपाठ का कर्म करने की कृपा करें. परस्पर प्रीतिपूर्वक रहने वाले यजमानगण देवताओं के अनुष्ठान कर के प्रस्थान करने की कृपा करें. ( ४७ ) अव॑भृथ निचुम्पु॒ण नि॒चेरु॑रसि निचुम्पु॒णः. अव॑ दे॒वैर्दे॒वकृ॑त॒मेनो॑यासिष॒मव॒ मर्त्यैर्मर्त्य॑कृ॒तं पु॒रुरा॒व्णो दे॑व रि॒षस्पाहि॑.. (४८) हे जलप्रवाह! आप नीचे की ओर बहने वाले और बहुत तीव्र वेग वाले हैं. फिर भी धीमी गति से बहने की कृपा कीजिए. आप देवताओं के प्रति किए गए पाप धोने के लिए पधारे हैं. आप दुःखदायी शत्रुओं से हमारी रक्षा करने की कृपा कीजिए. ( ४८ ) पूर्णा दर्वि॒ परा॑पत सु॒पूर्णा पुन॒राप॑त. व॒स्नेव॒ विक्री॑णावहा॒ इष॒मूर्ज॑ १७॒ शत॑क्रतो.. (४९) हे दर्वि देवी! आप पास स्थित अन्न से परिपूर्ण होने की कृपा कीजिए. आप इंद्र की ओर जाने की कृपा कीजिए. वे सैकड़ों यज्ञ करने वाले हैं. हम हवि रूप अन्न रस को आपस में बेचें ( आदानप्रदान करें ). ( ४९ ) देहि॑ मे ददामि ते॒ नि मे॑ धेहि॒ नि ते॑ दधे. नि॒हारं॑ च॒ हरा॑सि मे नि॒हारं॒ निह॑राणि ते॒ स्वाहा॑.. (५०) ( इंद्र कहते हैं ) हे यजमान! आप हमें हवि प्रदान कीजिए. हम आप को ( सुफल ) प्रदान करेंगे. आप निश्चित ( रूप से ) हवि धारण कीजिए. हम आप को अभीष्ट फल देंगे. ( यजमान कहते हैं ) हे इंद्र! हम निश्चय ही आप को हवि प्रदान करते हैं. आप भी हमारे लिए अन्न प्रदान कीजिए. आप के लिए स्वाहा. ( ५० ) यजुर्वेद - ५३