यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 55, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध तीसरा अध्याय अव रुद्रमदीमह्मव देवं त्र्यम्बकम्. यथा नो वस्यसस्करद्यथा नः श्रेयसस्करद्यथा नो व्यवसाययात्.. (५८) रुद्र देव व त्र्यंबक को हम लोगों की रक्षा करनी चाहिए. वे हमारे लिए आयुकारी ( बढ़ोतरी करने वाले ), श्रेयकारी व व्यवसायों की बढ़ोतरी करने वाले हों. ( ५८ ) भेषजमसि भेषजं गवेश्वाय पुरुषाय भेषजम्. सुखं मेषाय मेष्यै.. (५९) हे रुद्र! आप रोग निवारक ओषधि की भांति कष्ट निवारक हैं. आप हमारे घोड़ों के लिए ओषधि प्रदान कीजिए. आप हमारे व्यक्तियों के लिए ओषधि प्रदान कीजिए. हम अपने भेड़ और अन्य पशुओं की आप से कुशलता चाहते हैं. ( ५९ ) त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्. उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पतिवेदनम्. उर्वारुकमिव बन्धनादितो मुक्षीय मामुतः.. (६०) हे रुद्र! आप तीन दृष्टियों वाले हैं. हम आप की उपासना करते हैं. आप जीवन में सुगंध फैलाने व पौष्टिकता बढ़ाने वाले हैं. हमें संरक्षण प्रदान करते हैं. हम सांसारिक बंधनों से, वृक्ष से अलग हुए फल की भांति अलग हो जाएं; पर अमरता से नहीं. ( ६० ) एतत्ते रुद्रावसं तेन परो मूजवतोतीहि. अवततधन्वा पिनाकावसः कृत्तिवासा ऽ अहि ँषन् सन्तः शिवोतीहि.. (६१) हे रुद्र! आप अपने बचे हुए हवि-भाग को साथ ले कर मूंजवत पर्वत पार कर जाइए. आप अपना धनुष कपड़ों से ढक दीजिए. आप कल्याण करने वाले हैं. आप पर्वत को पार कर के पधार जाइए. ( ६१ ) त्र्यायुषं जमदग्नेः कश्यपस्य त्र्यायुषम्. यद्देवेषु त्र्यायुषं तन्नो अस्तु त्र्यायुषम्.. (६२) जमदग्नि की तीन अवस्थाएं हैं. कश्यप की तीन अवस्थाएं हैं. देवताओं की तीन अवस्थाएं हैं. हमारी भी ( वैसी ही ) तीन अवस्थाएं हों. ( ६२ ) शिवो नामासि स्वधितिस्ते पिता नमस्ते अस्तु मा मा हि ँसीः. नि वर्त्तयाम्यायुषेन्नाद्याय प्रजननाय रायस्पोषाय सुप्रजास्त्वाय सुवीर्याय.. (६३) आप का नाम ही शिव ( कल्याणकारी ) है. धारदार शस्त्र आप के पिता हैं. आप को हमारा नमन. आप हमें कभी कष्ट न दें. हम आयु, अन्न, प्रजनन, धन व पोषण के लिए आप से निवेदन करते हैं. हम अच्छी संतान एवं अच्छे वीर्य के लिए आप से निवेदन करते हैं. ( ६३ ) यजुर्वेद - ५५