यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंविश्वावसु की प्रशंसा ३ ३९ अग्नि की प्रमुखता ४ ४० देवताओं के लिए आसन ५ ४० जुहू यज्ञस्थान आदि ६ ४० अन्नदाता अग्नि की स्तुति ७-९ ४०-४१ इंद्र से धन देने का अनुरोध १० ४१ यज्ञ के रक्षक सविता देव की उपासना ११-१२ ४१ सविता और बृहस्पति की स्तुति १३ ४२ अग्नि की बढ़ोतरी के लिए समिधा १४-१६ ४२ अग्नि की परिधि १७ ४२-४३ अग्नि, इंद्र आदि देवगणों की वंदना १८-२८ ४३-४५ पितरों की स्तुति २९-३३ ४५ जलधाराओं से पितरों को तृप्त करने की प्रार्थना ३४ ४५ तीसरा अध्याय यजमानों से निवेदन १-२ ४६ अग्नि की स्तुति ३-१९ ४६-४९ गायों की स्तुति २०-२२ ४९ अग्नि की स्तुति २३-२६ ४९-५० इड़ा देवी के पधारने का आग्रह २७ ५० ब्रह्मणस्पति देव की उपासना २८-३० ५०-५१ मित्र अर्यमन आदि देवों की स्तुति ३१-३३ ५१ इंद्र की स्तुति ३४ ५१ सविता देव से बुद्धि को प्रेरित करने का आग्रह ३५-३६ ५१ बहुरूपा अग्नि की स्तुति ३७-४० ५१-५२ गृह प्रवेश संबंधी मंत्र ४१-४३ ५२ मरुद्गणों की स्तुति ४४ ५२ पापों से मुक्त होने के लिए यज्ञ ४५ ५३ इंद्र की स्तुति ४६-४७ ५३ अवभृथ ( यज्ञ के अंत में ) स्नान संबंधी मंत्र ४८ ५३ दर्वि देवी की उपासना ४९ ५३ इंद्र यजमान संवाद ५० ५३ इंद्र की उपासना ५१-५२ ५४ पितरों से निवेदन ५३-५६ ५४ रुद्र की स्तुति ५७-६१ ५४-५५