भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

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तीन अवस्थाएं ६२ ५५ शिव से कल्याण कामना ६३ ५५ चौथा अध्याय जल की महिमा का वर्णन १-३ ५६ सविता देव से पवित्र करने का अनुरोध ४ ५६-५७ इच्छापूर्ति के लिए देवताओं का आह्वान ५ ५७ यज्ञ के संकल्प की प्रेरणा ६-७ ५७ सविता देव की प्रार्थना ८-९ ५७-५८ यज्ञमेखला से ऊर्जा प्रदान करने का निवेदन १० ५८ अग्नि से याचना ११ ५८ अमृत स्वरूप जल १२ ५८ बुरे कामों से रक्षा के लिए अग्नि की उपासना १३-१५ ५९ यज्ञ में आराधनीय देव अग्नि की स्तुति १६-१८ ५९-६० मंत्र वाणी का स्वरूप १९ ६० वाग् देवी की स्तुति २०-२३ ६०-६१ सोम के लिए निवेदन २४ ६१ सविता देव की उपासना २५ ६१ सोम का स्वरूप २६-२७ ६१-६२ अग्नि की स्तुति २८-३० ६२ वरुण देव की स्तुति ३१-३२ ६२ सोम, मित्र व वरुण आदि से यज्ञ में आने का निवेदन ३३-३७ ६३ पांचवां अध्याय अग्नि की स्तुति १ ६४ शकल की स्तुति २ ६४ अग्नि की स्तुति ३-६ ६४-६५ सोम की स्तुति ७ ६५ अग्नि का स्वरूप ८ ६५-६६ पृथ्वी की स्तुति ९ ६६ उत्तरवेदिका का स्वरूप १०-१३ ६६-६७ यजमान और यज्ञ १४ ६७ विष्णु के तीन पैर १५ ६७ पृथ्वी का स्वरूप १६ ६७ देवगण और यज्ञ १७ ६७-६८