यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंविष्णु की स्तुति १८-२१ ६८ सविता से सहायता के लिए प्रार्थना २२ ६८-६९ अनिष्टकारी प्रयोगों को उखाड़ फेंकना २३ ६९ विशाल गर्त एवं विष्णु की प्रतिष्ठा २४-२५ ६९ सविता देव की स्तुति २६ ६९-७० गूलर की लकड़ी से सृष्टि विस्तार की कामना २७-२८ ७० इंद्र की स्तुति २९-३० ७० अग्नि की स्तुति ३१-३२ ७०-७१ ब्रह्मासन का स्वरूप ३३ ७१ अग्नि की स्तुति ३४-३८ ७१-७२ सविता की प्रशंसा ३९ ७२ अग्नि की स्तुति एवं उन का स्वरूप ४०-४१ ७२-७३ यूपवृक्ष की स्तुति एवं स्वरूप ४२-४३ ७३ छठा अध्याय यज्ञ साधनों की महत्ता १-२ ७४ विष्णु धाम का निरूपण ३-५ ७४-७५ यज्ञ की सर्वव्यापकता ६ ७५ सर्वगुण संपन्न त्वष्टा ७ ७५ पशुओं की मुक्ति ८ ७५ संतुष्टि के लिए यज्ञ ९ ७५-७६ यज्ञ एवं पशुओं की स्तुति १०-१२ ७६ आचरण शुद्धि का आग्रह १३-१५ ७६-७७ त्यागे हुए तृण की निंदा १६ ७७ याजक और यजमान १७-१९ ७७-७८ अंगअंग में इंद्र की व्यापकता २० ७८ हवि के विस्तार की कामना २१ ७८-७९ वरुण की कृपा की इच्छा २२ ७९ हवि की श्रेष्ठता २३ ७९ अग्नि की महत्ता २४ ७९ यज्ञ की सफलता के लिए प्रार्थना २५ ७९ जल, अग्नि तथा सोम की स्तुतियां २६-३६ ७९-८१ इंद्र की स्तुति ३७ ८२