यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ
पृष्ठ 82, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 82
पूर्वार्ध छठा अध्याय त्वमङ्ग प्रशं १४ सिषो देवः शविष्ठ मर्त्यम्. न त्वदन्यो मघवन्नस्ति मर्डितेन्द्र ब्रवीमि ते वचः.. (३७) हे इंद्र! आप प्रशंसित, शक्तिमान, दिव्य हैं व सुखदायी हैं. आप जैसा धनदायी कोई और देव नहीं है. हम आप के कृपा वचनों के आधार पर ही ऐसा कहते हैं. ( ३७ ) ८२ - यजुर्वेद