भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 83, कुल 421 में से

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पृष्ठ 83

सातवां अध्याय वाचस्पतये पवस्व वृष्णो ऽ अ १४ꣳ शुभ्यां गभस्तिपूतः. देवो देवेभ्यः पवस्व येषां भागोसि.. (१) हे सोम! आप वाचस्पति के लिए पवित्र होइए. आप शक्तिशाली, शुभ एवं गर्भ से ही पवित्र हैं. आप जिन देवताओं का भाग हैं, उन के लिए प्रवाहित होइए. (१) मधुमतीर्न ऽ इषस्कृधि यत्ते सोमादाभ्यं नाम जागृवि तस्मै ते सोम सोमाय स्वाहा स्वाहोर्वन्तरिक्षमन्वेमि.. (२) हे सोम! आप मधुर धाराओं वाले हैं. आप हमारा इष्ट कीजिए. आप हमें जाग्रत कीजिए. जाग्रत सोम के लिए स्वाहा. सोम से सोम के लिए स्वाहा. यह आहुति अंतरिक्ष में विस्तार पाने की कृपा करे. (२) स्वाङ्कृतोसि विश्वेभ्य ऽ इन्द्रियेभ्यो दिव्येभ्यः पार्थिवेभ्यो मनस्त्वाष्टु स्वाहा त्वा सुभव सूर्याय देवेभ्यस्त्वा मरीचिपेभ्यो देवा १४ꣳशो यस्मै त्वेडे तत्सत्यमुपरिप्लुता भङ्गेन हतो ऽ सौ फट् प्राणाय त्वा व्यानाय त्वा.. (३) आप स्वयंभू हैं. आप सभी देवों के लिए स्वयं प्रकाशित हुए हैं. आप इंद्रियों के लिए स्वयं प्रकाशित हुए हैं. आप स्वर्गलोक के लिए स्वयं प्रकाशित हुए हैं. आप पृथ्वी के लिए स्वयं प्रकाशित हुए हैं. पवित्र मन वाले आप के लिए स्वाहा. अच्छी तरह उत्पन्न होने वाले सूर्य के लिए स्वाहा. मरीचि देवों के लिए स्वाहा. मर्यादा भंग करने वालों का नाश कीजिए. आप सत्य से ओतप्रोत हैं. हम प्राण और व्यान से आप की उपासना करते हैं. (३) उपयामगृहीतोस्यन्तर्यच्छमघवन् पाहि सोमम्. उरुष्य राय ऽ एषो यजस्व.. (४) हे इंद्र! सोम को कलश में ग्रहण कर लिया है. आप इस की रक्षा कीजिए. आप यजमानों को भरपूर वैभव दीजिए एवं उन की शत्रुओं से रक्षा कीजिए. (४) अन्तस्ते द्यावापृथिवी दधाम्यन्तर्दधाम्युर्वन्तरिक्षम्. सजूर्देवैर्भवैरैः परैश्चान्तर्यामे मघवन् मादयस्व.. (५) हे इंद्र देव! स्वर्गलोक में, पृथ्वीलोक पर एवं अंतरिक्षलोक में आप का ही यजुर्वेद - ८३