भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 94, कुल 421 में से

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पृष्ठ 94

आठवां अध्याय उपयामगृहीतोस्यादित्येभ्यस्त्वा. विष्ण ऽ उरुगायैष ते सोमस्त र्थ् रक्षस्व मा त्वा दभन्.. ( १ ) हे सोम देव! आदित्य देव की तरह आप को कलश में ग्रहण करते हैं. हे विष्णु! हम आप के लिए स्तोत्र गाते हैं. आप सोमरस व हमारी रक्षा कीजिए. कोई भी आप का दमन न कर सके. ( १ ) कदा चन स्तरीरसि नेन्द्र सश्चसि दाशुषे. उपोपेन्नु मघवन् भूय ऽ इन्‍नु ते दानन्देवेस्य पृच्यत ऽ आदित्येभ्यस्त्वा.. ( २ ) हे इंद्र देव! आप अहिंसक हैं. आप हमारे पास पधारिए. आप हवि को ग्रहण कीजिए. आप धनवान हैं. आप अपने दान से हमें भी धनवान बनाइए. हम आदित्यों जैसा स्नेह पाने के लिए इंद्र देव की उपासना करते हैं. ( २ ) कदा चन प्र युच्छस्युभे नि पासि जन्मनी. तुरीयादित्य सवनं त ऽ इन्द्रियमातस्थावमृतन्दिव्यादित्येभ्यस्त्वा.. ( ३ ) हे पात्र! हम आदित्य देव की प्रसन्नता के लिए आप को ग्रहण करते हैं. आदित्य देव शांतचित्त, आनंददाता तथा देवों और मनुष्यों का कल्याण करने वाले हैं. ( ३ ) यज्ञो देवानां प्रत्येति सुम्नमादित्यासो भवता मृडयन्तः. आ वोर्वाची सुमतिर्ववृत्याद र्थ् होशचिद्वा वरिवोवित्तरासदादित्येभ्यस्त्वा.. ( ४ ) यज्ञ देवों के प्रति ( लिए ) हैं. हे अच्छे मन वाले आदित्यगण! आप हम सब के लिए सुखकारी हों. आप की प्राचीन और श्रेष्ठ मति हमें प्राप्त हो. इस से विपरीत बुद्धि वाले भी यज्ञ भाव में रुचि लें. आदित्य देव की प्रसन्नता के लिए सोम को ग्रहण करते हैं. ( ४ ) विवस्वन्नादित्यैष ते सोमपीथस्तस्मिन् मत्स्व. श्रदस्मै नरो वचसे दधातन यदाशीर्दा दम्पती वाममश्नुतः. पुमान् पुत्रो जायते विन्दते वस्वधा विश्वाहारप ऽ एधते गृहे.. ( ५ ) हे आदित्य! आप सोमरस पी कर प्रसन्न होइए. जो यजमान दंपती श्रेष्ठ वचनों ९४ - यजुर्वेद