भारतकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 95, कुल 421 में से

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पृष्ठ 95

पूर्वार्ध आठवां अध्याय से इन की उपासना करते हैं, श्रद्धा रखते हैं उन के पुरुषार्थी पुत्र पैदा होते हैं. धनधान्य भरपूर रहते हैं. घर में सुखशांति रहती है. ( ५ ) वाममद्य सवितर्वाममु श्वो दिवे दिवे वाममस्मभ्य ँ४ सावीः. वामस्य हि क्षयस्य देव भूरेरया धिया वामभाजः स्याम.. (६) हे सविता देव! हमारा आज सुखदायी हो. हमारा कल सुखदायी हो. हमारा प्रतिदिन सुखदायी हो. हम सुखदायी घर में रहें. हमारी बुद्धि सुखदायी हो. हम सदा सुख भोगने योग्य रहें. ( ६ ) उपयामगृहीतोसि सावित्रोसि चनोधाश्चनोधा ऽ असि चनो मयि धेहि. जिन्व यज्ञं जिन्व यज्ञपतिं भगाय देवाय त्वा सवित्रे.. (७) हम ने कलश ग्रहण कर लिया है. सविता देव अन्नदाता हैं. वह हमें अन्न प्रदान करने की कृपा करें. आप हमारे लिए अन्न धारिए व यज्ञपति का यज्ञ पूरा कराइए. हम अपने सौभाग्य के लिए सविता देव की उपासना करते हैं. ( ७ ) उपयामगृहीतोसि सुशर्मासि सुप्रतिष्ठानो बृहदुक्षाय नमः. विश्वेभ्यस्त्वा देवेभ्य ऽ एष ते योनिर्विश्वेभ्यस्त्वा देवेभ्यः.. (८) हे सोम! आप को कलश में ग्रहण कर लिया है. आप सुखदाता, सुप्रतिष्ठित, विशाल व कर्तव्य पालक हैं. हम आप को नमन करते हैं. सभी देवों के लिए आप की स्थापना की जाती है. आप देवों के मूल स्थान हैं. ( ८ ) उपयामगृहीतोसि बृहस्पतिसुतस्य देव सोम त ऽ इन्दोरिन्द्रियावतः पत्नीवतो ग्रहाँ २ ऋध्यासम्. अहं परस्तादहमवस्ताद्यदन्तरिक्षं तदु मे पिताभूत्. अह ँ४ सूर्यमुभयतो ददर्शाहं देवानां परमं गुहा यत्.. (९) हे सोम! आप बृहस्पति के पुत्र हैं. हम ने आप को उपयाम में ग्रहण कर लिया है. हम सोम को पत्नी के साथ ग्रहण करते हैं. हम उन की बढ़ोतरी करते हैं. अंतरिक्ष पिता तुल्य हैं. हम सब ओर से उन का संरक्षण पाए हुए हैं. हम दोनों ओर से सूर्य के दर्शन करें. हम देवताओं की परम गुहा के दर्शन करें. ( ९ ) अग्ना ३ इ पत्नीवान्त्सजूर्देवेन त्वष्ट्रा सोमं पिब स्वाहा. प्रजापतिर्वृषासि रेतोधा रेतो मयि धेहि प्रजापतेस्ते वृष्णो रेतोधसो रेतोधामशीय.. (१०) हे अग्नि! आप पत्नी सहित त्वष्टा देव की भांति सोमपान कीजिए. हम आप के लिए आहुति समर्पित करते हैं. हे प्रजापति! आप वीर्य धारक हैं. आप हमें वीर्यवान बनाइए. आप पराक्रमी हैं. आप हमारे लिए पराक्रम धारिए. हम वीर्यवान व शक्तिशाली हों. ( १० ) यजुर्वेद - ९५