भारतकोश
यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

Yatharth Geeta - Srimad Bhagavad Gita (Swami Adgadanand)

स्वामी अड़गड़ानन्द द्वारा

स्रोत: मानव धर्मशास्त्र - ५२०० वर्षों के अन्तराल के बाद श्रीमद्भगवद्गीता की शाश्वत व्याख्या · श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्दजी आश्रम ट्रस्ट · 2015 (उद्गम)

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अष्टादश अध्याय ३५१ बयारी। ते हठि देहिं कपाट उघारी।।' ( रामचरितमानस, ७/११७/११- १२)- ये ही दुर्जय दुर्ग हैं। मेरी कृपा से तू इन बाधाओं का अतिक्रमण कर जायेगा; किन्तु यदि अहंकार के कारण मेरे वचनों को नहीं सुनेगा तो विनष्ट हो जायेगा, परमार्थ से च्युत हो जायेगा। इस बिन्दु को योगेश्वर ने कई बार दृढ़ाया है। देखें- १६/१८-१९, १७/५-६। १६/२३ में वे कहते हैं- इस शास्त्रविधि को त्यागकर अन्य-अन्य विधियों से जो भजते हैं उनके जीवन में न सुख है, न शान्ति है, न सिद्धि है और न परमगति ही है। वह सबसे भ्रष्ट हो जाता है। यहाँ कहते हैं-यदि अहंकारवश तू मेरी बात नहीं सुनेगा तो विनष्ट हो जायेगा। अतः लोक-समृद्धि और परमश्रेय की प्राप्ति के लिये सम्पूर्ण साधन-क्रम का आदिशास्त्र योगेश्वर श्रीकृष्णोक्त यही 'गीता' है। पुनः इसी पर बल देते हैं- यदहङ्कारमाश्रित्य न योत्स्य इति मन्यसे। मिथ्यैष व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति।।५९।। जो तू अहंकार का आश्रय लेकर ऐसा मानता है कि युद्ध नहीं करूँगा, तो यह तेरा निश्चय मिथ्या है; क्योंकि तेरा स्वभाव तुझे बलात् युद्ध में लगा देगा। स्वभावजेन कौन्तेय निबद्धः स्वेन कर्मणा। कर्तुं नेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत् ।।६०।। कौन्तेय! मोहवश तू जिस कर्म को नहीं करना चाहता, उसको भी अपने स्वभाव से उत्पन्न हुए कर्म से बँधा हुआ परवश होकर करेगा। प्रकृति के संघर्ष से न भागने का तुम्हारा क्षत्रिय श्रेणी का स्वभाव तुम्हें बरबस कर्म में लगायेगा। प्रश्न पूरा हुआ। अब वह ईश्वर रहता कहाँ है? इस पर कहते हैं- ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।।६१।। अर्जुन! वह ईश्वर सम्पूर्ण भूतप्राणियों के हृदय-देश में निवास करता है। इतना समीप है तो लोग जानते क्यों नहीं? मायारूपी यन्त्र में आरूढ़ होकर सबलोग भ्रमवश चक्कर लगाते ही रहते हैं, इसलिये नहीं जानते। यह यन्त्र बड़ा बाधक है, जो बार-बार नश्वर कलेवरों (शरीरों) में घुमाता रहता है। तो शरण किसकी लें?-

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