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भारतकोश
योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण

Yog Vashishta Maha Ramayan

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,734 पृष्ठ

पृष्ठ 1490, कुल 1734 में से

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पृष्ठ 1490

☸ निर्वाण प्रकरण ☸

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जो राजा हुआ, उसने वही अवस्था देखी । पश्चिम दिशा का हेमचू पक्षी की पीठ पर पहुँचा । उसने उसे कुशद्वीप में डाल दिया, इससे उसने भी अनेक अवस्था पाई । हे राम ! एक-एक विपश्चित् ने भिन्न- भिन्न योनियों और अवस्थाओं का अनुभव किया ।

राम ने पूछा, हे भगवन् ! तुम कहते हो कि विपश्चित् एक ही था और उन चारों की संवित् भी एक ही थी, आकार भी एक ही था तो भिन्न- भिन्न रुचि कैसे हुई, जो एक पक्षी हुआ, दूसरा वृक्ष हुआ और वे वासना के अनुसार अनेक शरीर पाते फिरे । वशिष्ठजी बोले, हे राम ! इसमें क्या आश्चर्य है ? उनकी संवित् एक ही थी, परन्तु भ्रम से भिन्नता हो जाती है । जैसे किसी पुरुष को स्वप्न होता है तो उसमें वह पशु-पक्षी हो जाता है और भिन्न-भिन्न रुचि भी हो जाती है, वैसे ही उनकी भी भिन्न-भिन्न रुचि हो गईं । जैसे देखो कि शरीर तो एक ही होता है, पर उसमें नेत्र, श्रवण, नासिका, जिह्वा और त्वचा की रुचि भिन्न-भिन्न होती है और इन्द्रियाँ अपने-अपने विषयों को ग्रहण करती हैं, सो एक ही शरीर में अनेकता भासित होती है, वैसे ही उनकी एक ही संवित् थी, परन्तु संकल्प भिन्न-भिन्न हो गया था, इससे मन के फुरने से एक देह में अनेक भासित हुई । जैसे एक ही योगेश्वर इच्छा करके और और शरीर धर लेता है और एक से अनेक हो जाता है । एक सहस्र- बाहु अर्जुन था । वह किमी भुजा से युद्ध करता था, किमी भुजा से दान करता था और किमी एक मे लेता-देता था । इमी प्रकार मब भुजाओं से चेष्टा करता था—वे भी भिन्न-भिन्न हुए ? एक ही शरीर में भिन्न-भिन्न चेष्टा होती है । जैसे विष्णु भगवान् कहीं दैत्यों के साथ युद्ध और कहीं कर्म करते हैं, कहीं लीला करते हैं और कहीं शयन करते हैं, सो संवित् तो एकही है, परन्तु चेष्टा भिन्न-भिन्न होती हैं, वैसे ही उनकी संवित् में अनेक रुचि हुई तो इसमें क्या आश्चर्य है ? हे राम ! इस प्रकार उन्होंने जन्म से जन्मान्तर को अविद्याकृत संसार में देखा ।

राम ने पूछा, हे भगवन् ! वे तो बोधवान् विपश्चित् थे और बोधवान् जन्म नहीं पाता, फिर उनका किस प्रकार जन्म हुआ ?

योगवाशिष्ठ महारामायण · पृष्ठ 1490, कुल 1734 में से · BharatKosha