सामग्री पर जाएँ
भारतकोश
योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण

Yog Vashishta Maha Ramayan

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,734 पृष्ठ

पृष्ठ 754, कुल 1734 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 754

उपशम प्रकरण । ७६३

जहाँ तुम्हारी इच्छा हो वहाँ बिचरो तो तुमको बन्धन न होगा। जब प्राण फुरता है तब मन उदय होता है और जब मन उदय हुआ तब संसारभ्रम होता है जब मन क्षीण होता है तब संसारभ्रम नष्ट हो जाता है। हे रामजी! जब मन से संसार की वासना मिट जाती है तब अशब्द पद प्राप्त होता है। जिससे यह सर्व है, और जो यह सर्व है, जिससे न सर्व है और जो न सर्व है, जो न सर्व में है और जिसमें न यह सर्व है ऐसा जो निर्गुण-तत्त्व है सो सर्वकल्पना के त्यागे से प्राप्त होता है उसको उपमा किसकी दीजे। आत्मा अविनाशी, निर्विकल्प और निर्गुण है, यह जगत् नाश-रूपी संकल्प से रचित गुप्तरूप है, उसका किस पदार्थ से दृष्टान्त दीजे ? अर्थात् दूसरा कुछ नहीं, जितने कुछ स्वाद हैं उनको स्वादकर्त्ता वही है और जितने प्रकाश हैं उनको प्रकाशकर्त्ता वही है, सर्वकल्पना का कलना रूप वही है और जितने पदार्थ हैं उन सबका अधिष्ठानरूप वही है। वह चित्त और आवरण के दूर हुए प्राप्त होता है और सब पदार्थों की सीमा वही है। ऐसा जो आत्मरूप शीतल चन्द्रमा है जब उसमें बुद्धिमान् स्थित होता है तब जीवन्मुक्त कहलाता है और उसकी सब इच्छा और आश्चर्य नष्ट हो जाता है, अहं त्वं आदिक कल्पना मिट जाती है, सर्व व्यवहार विस्मरण हो जाता है। ऐसा जो मुक्त मन है सो पुरुषोत्तम होता है।

इति श्रीयोगवाशिष्ठे उपशमप्रकरणे जीवन्मुक्तज्ञानबन्धो नाम त्रिंसप्ततितमस्सर्गः ॥ ७३ ॥

रामजी ने पूछा, हे प्रभो ! योग की युक्ति तो आपने कही जिससे चित्त उपशम होता है अब सम्यक्ज्ञान का लक्षण भी कृपा करके कहिये। वशिष्ठजी बोले, हे रामजी! यह तो निश्चय है कि आत्मा आनन्दरूप, आदिअन्त से रहित, प्रकाशरूप, सर्व परमात्मातत्त्व है इसी निश्चय को बुद्धीश्वर सम्यक्ज्ञान कहते हैं। यह जो घट पटादिक अनेक पदार्थशक्ति है वह सब परमानन्दरूप आत्मा है उससे भिन्न नहीं। यह सम्यक्ज्ञानी की दृष्टि है और सर्वात्मा नित्य, शुद्ध, परमानन्दस्वरूप, सदा अपने आपमें स्थित है ऐसा निश्चय सम्यक्ज्ञान है और जो इससे भिन्न है सो असम्यक् ज्ञान है। हे रामजी! सम्यक्दर्शी को मोक्ष है और असम्यक्दर्शी को बन्ध है