सामग्री पर जाएँ
भारतकोश
योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण

Yog Vashishta Maha Ramayan

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,734 पृष्ठ

पृष्ठ 771, कुल 1734 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 771

७८० योगवाशिष्ट ।

ओर धावेगा तो तेरा कल्याण न होगा और जो आत्मा की ओर आवेगा तो तेरा कल्याण होगा जब तू अपना अभाव कर आत्मपद में स्थित होगा तब कल्याणरूप होगा और जो तू अपना सद्भाव करेगा कि आकार को न त्यागेगा तो दुःखी होगा । जो तेरा जीना है वह मृत्यु समान है और जो मृत्यु है सो जीने के समान है । दोनों पक्षों में जो तेरी इच्छा हो सो अङ्गीकार कर । जो तू अबही आपको आत्मपद में निर्वाण करेगा तो परमपद को प्राप्त होकर परमसुखी होगा और जो न करेगा तो परम दुःखी होगा जो आत्मपद को त्याग करेगा वह मूढ़ है । तेरा निर्वाण होना आत्मपद में जीने का निमित्त है और आत्मा से भिन्न जो तू जीने की इच्छा करता है सो तेरा जीना मिथ्या अर्थात् तू आदि भी मिथ्या है और अब भी विचार बिना भ्रममात्र है, विचार किये से नष्ट हो जावेगा । जैसे सूर्य के प्रकाश बिना अंधकार होता है और प्रकाश से नष्ट हो जाता है तैसे ही विचार बिना चित्त है, विचार से नष्ट हो जाता है । इतने काल में अविवेक से ही जीता था । जैसे बालकों को अपनी परछाईं में वैताल कल्पना होती है और विचार बिना भय पाती है-विचार किये से निर्भय होता है तैसे ही अब मैं तेरे संग से छूट अपने पूर्व स्वरूप को प्राप्त हुआ हूँ और विवेक से तेरा अभाव हुआ है । इससे विवेक को नमस्कार है । हे चित्त ! अविवेक से तू मेरा मित्र था अब बोध से तेरा चित्तभाव नष्ट हो गया । तू परमेश्वररूप है । अब वासना नष्ट हुई है । आगे तेरे में नाना प्रकार की वासना थी उससे तू मलिन और दुःस्वरूप था । अब वासना के नष्ट होने से तेरा परमेश्वररूप हुआ है । तेरे में अज्ञान से चित्तस्वभाव उपजा दुःखों का कारण था सो विवेक से लीन हुआ है । जैसे रात्रि के पदार्थ सूर्य के उदय हुए लीन हो जाते हैं तैसे ही विवेक से चित्तभाव नष्ट हुआ है सो सिद्धान्त का कारण है । तेरे संग से मैं तुच्छ सा हो गया था, अब शास्त्रों की युक्ति से निर्णय किया है कि न तू आगे था, न अब है और न फिर होगा । जबतक मैंने आपको न जाना था तबतक तेरा सद्भाव था, अब मैंने आपको जाना है और अपने आपमें स्थित हुआ हूँ । अब मैं परम निर्वाण और शान्त