योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण
Yog Vashishta Maha Ramayan
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)
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२ योगवासिष्ठ
| सर्गाङ्क | विषय | पृष्ठाङ्क | सर्गाङ्क | विषय | पृष्ठाङ्क | सर्गाङ्क | विषय | पृष्ठाङ्क |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ८० | परमार्थउपदेश | २४३ | तृतीय भूमिका-लक्षण विचार | ३४० | १३९ | भुशुण्डिविद्याधरो-पाख्यानसमाप्ति | ४०६ | |
| ८१ | शिखरध्वजबोध | २४६ | ११३ | तृतीय भूमिका-विचार | ३४३ | १४० | अहंकारअस्तयोगो-पदेश | ४११ |
| ८२ | शिखरध्वजबोधप्राप्ति | २५१ | ११४ | विश्ववासनारूप | ३४६ | १४१ | विराद् आत्मा | ४१२ |
| ८३ | विवाहलीला | २५६ | ११५ | सृष्टिनिर्वाणएकता-प्रतिपादन | ३४६ | १४२ | ज्ञातस्वन्धयोग | ४१८ |
| ८४ | मायाशकागमन | २६१ | ११६ | विश्वआकाश-एकताप्रतिपादन | ३५१ | १४३ | सुखेन योगोपदेश | ४२२ |
| ८५ | मायापिकचर | २६२ | ११७ | विश्वविजय | ३५३ | १४४ | सद्विरक्ति परम-वैराग्यनिरूपण | ४२८ |
| ८६ | चुडालामाहात्म्य | २६४ | ११८ | विश्वभ्रमण | ३५६ | १४५ | सद्विवेकाभ्ययोग | ४३१ |
| ८७ | शिखरध्वजचुडाला-ख्यान | २६७ | ११९ | जगद्भावप्रतिपादन | ३५६ | १४६ | सद्विरक्तविप्रबोध | ४३३ |
| ८८ | बृहस्पतिबोधन | २६६ | १२० | पिण्डनिर्णय | ३६४ | १४७ | सद्विरक्तविनिर्वाण-आदित | ४३६ |
| ८९ | मिथ्यापुरुषआकाश-वृत्तान्तरूप | २७२ | १२१ | बृहस्पतिबलिसंवाद | ३६६ | १४८ | सुखेन योगोपदेश | ४४० |
| ९० | मिथ्यापुरुषोपाख्यान-समाप्ति | २७४ | १२२ | तथा | ३६८ | १४९ | निराशयोगोपदेश | ४४२ |
| ९१ | परमार्थयोगोपदेश | २७६ | १२३ | चित्त अभावप्रति-पादन | ३७० | १५० | भावनाप्रतिपादनो-पदेश | ४४४ |
| ९२ | महाकर्त्तृभ्युपदेश | २७६ | १२४ | पञ्चभूमिका | ३७१ | १५१ | हंससंन्यासयोग | ४४६ |
| ९३ | कलनानिषेध | २८२ | १२५ | षष्ठभूमिकाउपदेश | ३७४ | १५२ | निर्वाणयुतमुक्त्यु-पदेश | ४५१ |
| ९४ | समत्वलक्षणमाहात्म्य | २८४ | १२६ | सप्तभूमिकालक्षण-विचार | ३७७ | १५३ | शान्तिस्थितयोगो-पदेश | ४५५ |
| ९५ | इक्ष्वाकुप्रत्यक्षोपदेश | २८६ | १२७ | संसरअभावप्रति-पादन | ३७८ | १५४ | परमार्थयोगोपदेश | ४५८ |
| ९६ | राजाइक्ष्वाकुप्रत्यक्षो-पदेश | २९१ | १२८ | इच्छाचिकित्सो-पदेश | ३८० | १५५ | तथा | ४६२ |
| ९७ | मनुइक्ष्वाकुआख्याने सर्वब्रह्मप्रतिपादन | २९७ | १२९ | कर्मबीजदाहोपदेश | ३८४ | १५६ | इच्छानिषेधयोगो-पदेश | ४६४ |
| ९८ | परमनिर्वाण | ३०१ | १३० | अहंकारनाशविचार | ३८६ | १५७ | जगत् उपदेश | ४६७ |
| ९९ | मोक्षरूप | ३०४ | १३१ | विद्याधरवैराग्य | ३८६ | १५८ | परमनिर्वाणयोगो-पदेश | ४७३ |
| १०० | परमार्थोपदेश | ३०६ | १३२ | संसाररूपवृक्ष | ३८७ | १५९ | वशिष्ठगीतोपदेश | ४७७ |
| १०१ | समाधान | ३१० | १३३ | संसारआडम्बर-उत्पत्ति | ३८८ | १६० | वशिष्ठगीतासारो-पदेश | ४८० |
| १०२ | मनुइक्ष्वाकुसंवाद-समाप्ति | ३१४ | १३४ | चित्तचमत्कार | ३९६ | १६१ | जगत् उपशमयोगो-पदेश | ४८२ |
| १०३ | ज्ञानीलक्षणविचार | ३१५ | १३५ | सर्गउपसर्गोपदेश | ४०० | १६२ | पुननिर्वाणउपदेश | ४८३ |
| १०४ | कर्म्माकर्मविचार | ३१७ | १३६ | यथामृतार्थभाव-रूपयोगोपदेश | ४०२ | १६३ | ब्रह्मैकत्वाप्रतिपादन | ४८७ |
| १०५ | तुरीयपदविचार | ३२२ | १३७ | इन्द्रोपाख्याने त्रस-रेणुजगत् | ४०४ | १६४ | हरिगोपाख्यानवृत्ता-न्तयोगोपदेश | ४९२ |
| १०६ | काष्ठमौनवृत्तान्त | ३२४ | १३८ | सङ्कल्पासङ्कल्प-कताप्रतिपादन | ४०७ | १६५ | मनमुगोपाख्यान-योगोपदेश | ४९५ |
| १०७ | अविद्यानाशरूप | ३२६ | ||||||
| १०८ | जीवत्वअभावप्रति-पादन | ३३० | ||||||
| १०९ | सारप्रयोग | ३३१ | ||||||
| ११० | ब्रह्मैकत्वप्रतिपादन | ३३२ | ||||||
| १११ | निर्वाणनिरूपण | ३३६ | ||||||
| ११२ | प्रथम द्वितीय और |