योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण
Yog Vashishta Maha Ramayan
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)
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योगवाशिष्ठ की अनुक्रमणिका ।
द्वितीय भाग ।
| सर्गाङ्क | विषय | पृष्ठाङ्क | सर्गाङ्क | विषय | पृष्ठाङ्क | सर्गाङ्क | विषय | पृष्ठाङ्क |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| निर्वाणप्रकरण पूर्वार्द्ध | २७ | रुद्रवशिष्ठसमागम | ७३ | प्रतिपादन | १४७ | |||
| १ | दिवसरात्रिव्यापार | १ | २८ | ईश्वरोपाख्याने जगत्परमात्मरूप | ७५ | ५४ | जीवन्निर्णय | १५० |
| २ | विश्रामदृढीकरण | ३ | २९ | वशिष्ठेश्वरसंवादे चैतन्योन्मुखत्वविचार | ७८ | ५५ | श्रीकृष्णसंवादे अर्जुनविश्रान्ति | १५२ |
| ३ | ब्रह्मैक्यप्रतिपादन | ७ | ३० | ईश्वरोपाख्याने मनःप्राणोक्तप्रतिपादन | ८५ | ५६ | श्रीकृष्णअर्जुनसंवादे भविष्यद्गीता | १५६ |
| ४ | चित्तभावाभाव | ६ | ३१ | तथा देहपातविचार | ८६ | ५७ | प्रत्यक् आत्मबोध | १५७ |
| ५ | राघवविश्रान्ति | १० | ३२ | तथा दैवप्रतिपादन | ६२ | ५८ | विभूतियोगोपदेश | १६१ |
| ६ | अज्ञानमाहात्म्य | ११ | ३३ | तथा परमेश्वरोपदेश | ६६ | ५९ | जाग्रत्स्वप्नविचार | १६२ |
| ७ | अविद्यालता | १२ | ३४ | ईश्वरोपाख्यानदेवनिर्णय | ६५ | ६० | ब्रह्मैकताप्रतिपादन | १६३ |
| ८ | अविद्यानिराकरण | २० | ३५ | महेश्वरवर्णन | १०० | ६१ | वैताल प्रश्नोक्ति | १६६ |
| ९ | अविद्याचिकित्सा | २२ | ३६ | ईश्वरोपाख्याने नीतिनृत्य | १०१ | ६२ | राजावैतालसंवादे वैतालप्रश्नापद्प्राप्ति | १७६ |
| १० | जीवन्मुक्तिनिश्चयोपदेश | २५ | ३७ | ईश्वरपा० अन्तःबाह्यपू० | १०२ | ६३ | भगीरथोपदेश | १८० |
| ११ | जीवन्मुक्तिनिश्चय | ३१ | ३८ | देवअर्चनाविधान | १०४ | ६४ | निर्वाणवर्णन | १८३ |
| १२ | ज्ञानज्ञेयविचार | ३२ | ३९ | ईश्वरोपाख्याने देवपूजाविचार | १०८ | ६५ | भगीरथोपाख्यानसमाप्ति | १८५ |
| १३ | भुशुण्डोपाख्यान | ३३ | ४० | जगन्मिथ्यात्वप्रतिपादन | १०६ | ६६ | शिखिध्वजचूडालोपाख्यान | १८६ |
| १४ | भुशुण्डिदर्शन | ३५ | ४१ | परमार्थविचार | ११३ | ६७ | चूडालाप्रबोध | १९८ |
| १५ | भुशुण्डिसमागम | ३६ | ४२ | विश्रान्ति आगमन | ११६ | ६८ | अग्निसोमविचारयोग | १६० |
| १६ | भुशुण्डोपाख्यान | ३७ | ४३ | चित्तसत्तासूचन | ११८ | ६९ | चिन्तामणिवृत्तान्त | २०२ |
| १७ | सन्तमाहात्म्य | ४१ | ४४ | बिलोपाख्यान | १२० | ७० | हस्तिआख्यान | २१६ |
| १८ | भुशुण्डोपाख्याने जीवितवृत्तान्त | ४४ | ४५ | शिलाकोशोपदेश | १२२ | ७१ | हस्तिवृत्तान्त | २१७ |
| १९ | चिरअतीत | ४७ | ४६ | सत्ताउपदेश | १२४ | ७२ | शिखिध्वजसर्वत्याग | २२१ |
| २० | भुशुण्डोपाख्याने संकल्पनिराकरण | ४९ | ४७ | ब्रह्मैकताप्रतिपादन | १२६ | ७३ | चित्तत्याग | २२३ |
| २१ | भुशुण्डिप्राणापानसमाधि | ५० | ४८ | स्मृतिविचारयोग | १२८ | ७४ | राजविश्रान्ति | २२७ |
| २२ | भुशुण्डिचिरञ्जीविहेतु | ५५ | ४९ | संवेदन विचार | १३१ | ७५ | शिखिध्वजविश्रान्ति | २३३ |
| २३ | भुशुण्डोपाख्यानसमाप्ति | ५७ | ५० | यथार्थोपदेश | १३४ | ७६ | शिखिध्वजबोध | २३४ |
| २४ | परमार्थयोगोपदेश | ५६ | ५१ | नारायणअवतार | १४० | ७७ | शिखिध्वजप्रथमबोध | २३८ |
| २५ | देहसत्ताविचार | ६४ | ५२ | अर्जुनोपदेश | १४२ | ७८ | शिखिध्वजबोध | २३६ |
| २६ | वशिष्ठाश्रम | ७१ | ५३ | अर्जुनोपदेश सर्वब्रह्म- | ७९ | तथा | २४१ |