सामग्री पर जाएँ
भारतकोश
योगवाशिष्ठ महारामायण

योगवाशिष्ठ महारामायण

Yog Vashishta Maha Ramayan

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

स्रोत: योगवाशिष्ठ महारामायण (हिन्दी भाषा टीका) · Archive.org (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,734 पृष्ठ

पृष्ठ 944, कुल 1734 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 944

१३४ ❈ योगवाशिष्ठ ❈

हे राम ! जैसे झरोखे के आगे कोई पदार्थ रखिये तो झरोखे को पदार्थ का ज्ञान नहीं होता और जब उसका स्वामी देखता है तब पदार्थ का ग्रहण करता है, वैसे ही इन्द्रियों के स्थानों में जो सूक्ष्मतन्मात्रा ग्रहण करनेवाली होती है, वही विषयों को ग्रहण करती है, और जब तन्मात्रा नहीं होती, तब इन्द्रियाँ ग्रहण नहीं कर सकतीं। हे राम ! प्रत्यक्ष देखो कि कथा का श्रोता पुरुष कथा में बैठा होता है, पर यदि उसका चित्त और जगह निकल जाता है, तब प्रत्यक्ष बैठा रहता है; किन्तु कुछ नहीं सुनता, क्योंकि उसकी श्रवण इन्द्रिय मन के साथ गई है; वैसे ही जब पुर्यष्टका निकल जाती है तब मृतक होता है और इन्द्रियाँ भी विषयों को ग्रहण नहीं करतीं। हे राम ! अहं-मम आदि दृश्य भी सर्ग के आदि में आत्मरूपी समुद्र में तरङ्ग की तरह निकला है, उसके पश्चात् दृश्य कल्पना हुई है। अतएव न देश है, न काल है, न क्रिया है। यह सब असतरूप है; वास्तव में कुछ नहीं। यह जानकर संसार के सुख, दुःख, हर्ष, शोक, राग, द्वेष से रहित होकर विचरो, तब तुम माया से मुक्त हो जाओगे।

इति श्रीयोगवाशिष्टे निर्वाणप्रकरणे संवेदनविचारो नामैकोन- पञ्चाशत्तमस्सर्गः ॥ ४९ ॥

वशिष्ठजी बोले, हे राम ! वास्तव में इन्द्रियादिक गण कुछ उपजे नहीं हैं। आदि-ब्रह्मा की उत्पत्ति मैंने तुमसे कही और तुमने सुनी है। जैसे आदि-जीव पुर्यष्टकारूप ब्रह्मा उपजे हैं, वैसे ही और भी सब उपजे हैं। हे राम ! जीव पुर्यष्टका में स्थित होकर जैसी-जैसी भावना करता गया, वैसा ही वैसा भासित होने लगा है और फिर उसी की सत्ता पाकर अपने-अपने विषय को ग्रहण करने लगा है। वास्तव में इन्द्रियाँ भी कुछ वस्तु नहीं। जब आत्मा के आभास में चेतता है, इन्द्रियाँ और इन्द्रियों के विषय संवेदन में उपजे हैं। ये जैसे उपजे हैं, सो तुमसे कह चुके हैं। हे राम ! शुद्ध संवित् सत्तामात्र में जो अहं का उन्मेष हुआ, वही संवेदन है। वही संवेदन जीवरूप पुर्यष्टकाभाव को प्राप्त होकर बुद्धि, मन और पञ्चतन्मात्रा को उपजाकर आपही उनमें

योगवाशिष्ठ महारामायण · पृष्ठ 944, कुल 1734 में से · BharatKosha