भारतकोश
योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi

अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished485 पृष्ठ

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४२८ योगिनीहृदयपरिशिष्टे बाह्यो दशारभागोऽयं ७२ सु. वा. १५ | भोग्यभोक्तृमय १८ चि. च. २१२ बिन्दुं संकल्प्य ३५४ नि. षो. १.१८५ | भोगेषु रञ्जयन्ती १४७ सौ. सु. १.३७ बिन्दुतत्त्वं समाख्यातं ४३ स्व. सं. | भ्रामणी क्लेदिनी चैव २८९ स्व. सं. बिन्दुरहङ्कारात्मा २१, १३०, ३६१ का. वि. ७ | मधुलुब्धो यथा ९ कु. त. १३.१३२ बिन्दुर्वेद्यस्य संस्कारो ३७२ प. प. ३७ | मध्यगा डाकिनी ३९ स्व. सं. बिन्द्वावरणमूर्ध्वतः ४३ स्व. सं. | मध्यत्रिकोणकोणे ६१ सौ. सु. ५.२ बुद्धिमये परेतेजः ६१ सौ. सु. ५.२ | मध्यमं वज्रकण्ठं च ३३४ स्व. सं. बुद्धिव्यापारनिश्चय १८७ स्व. सं. | मनः संक्रमते यत्र ४९ स्व. सं. बुद्धीन्द्रियाणि व्यापारा १८८ स्व. सं. | मननात् त्राणधर्माऽसौ १०४ सं. प. बुद्ध्यादिसामरस्य १४८ सौ. सु. १.४१ | मनो बुद्धिरहङ्कारो १८९ स्व. सं. बृह वृद्धौ १२६ धा. ७३५ स्वा. | मन्त्रसिंहासनस्थेन १७३ स्व. भै. ब्रह्मरन्ध्रे यवादूर्ध्वं ३२९ स्व. सं. | मलमात्रेण संच्छन्नः १६४ स्व. सं. ब्रह्माणी त्वपरा ४७, १७० स्व. सं. | मलादीनामपाके तु १८१ स्व. सं. ब्रह्माणीं पश्चिमद्वारे ३१२ नि. षो. १.१५६ | महत्त्वस्रं चिन्तयामि ७१ सु. वा. १८ ब्रह्मात्र सृष्टिसृष्टा १२१ सौ. सु. २.९ | महात्रिपुरसुन्दर्या ७२ सु. वा. १६ ब्रह्मादिपरमेशानां ४४ स्व. सं. | महापद्मवनं चैव २२५ स्व. सं. भवानि भवशान्त्यै त्वां २९२ सौ. हृ. ७ | महापद्मवनान्तस्थे ३०३ मन्त्र भावनागममतीन्द्रियं २०२ चि. च. १३ | महाविद्येश्वरी दूती ३०८, ३५६ नि.षो. १.२७ भावयेद्दूरितावस्थां २३०, २९९, ३८७ वि. भै. ७१ | महाशून्यालये वह्नौ २९६ वि. भै. १४६ भास्वानिव जयत्येको ३०१ सं. प. | महान्तीकरोमीदं २९७, ३७७ सु. वा. ३९ भीषास्मादग्नि १२ तै. उ. २.८ | महीयसे महाभोक्त्रे ३४७ ग. स्तो. भीषास्माद् वातः १२ तै. उ. २.८ | माता मानं मेयं १४१ का. वि. १३ भुक्त्वा भोगानि १६५ स्व. सं. | मादनं तदधः शक्तिः १७९, २१३ नि. षो. १.१११ भुङ्क्ते भोगान् यथा १८६ स्व. सं. | मादनैर्मददो भूत्वा ३५१ नि. षो. ४.६० भूततन्मात्रशब्द १८८ स्व. सं. | मायाबीजं महेशानि ३६७ नि. षो. १.११६ भूतिभूमिः सती रम्या २३४ ग्रन्था. | माया विभेदबुद्धि १४६ सौ. सु. १.३२ भूयो भूयः परे भावे २२८ वि.भै. १५२ | मितिः सम्यक्परि ६७ कु. का. ४.५ भेद लक्षणविपक्ष १०७ चि. स्त. ७ | मिथुनमिदं शिव १२० सौ. सु. २.६ भेदाभासमिदं हव्यं २८० सु. वा. ६४ | मिश्राः प्रमातृरूपाः १६४ स्व. सं. भैरव्यो भरिताकारा १०८, २१३ प्रा. व.