भारतकोश
योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi

अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished485 पृष्ठ

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[ ४८ ] प्रकटा आदि नौ योगिनियों का आवरण देवताओं के साथ त्रैलोक्यमोहन आदि नौ चक्रों में पूजन ३०८-३५६ भूतलिपि का विन्यास क्रम ३२५-३४५ चक्रपूजा के बाद कुलदीप निवेदन ३५७-३५८ पुष्पांजलि समर्पण के बाद जपविधान ३५८ कूटत्रय तथा कुण्डलीत्रय में नाद की भावना ३५८-३६२ जप के समय शून्यषट्क आदि की भावना ३६३ शून्यषट्क की भावना का प्रकार ३६३-३६४ अवस्थापंचक की भावना का प्रकार ३६५-३६८ विषुवसप्तक की भावना का प्रकार ३६९-३७६ चक्रदेवताओं का तर्पण ३७६-३७८ नैमित्तिक पूजन ३७८-३७९ श्रीचक्र में ६४ करोड़ योगिनियों का निवास ३७९-३८० अष्टाष्टक पूजा ३८०-३८१ गुरुपरम्परा से प्राप्त ज्ञान की फलवत्ता ३८१-३८२ नैवेद्य समर्पण एवं बलि निवेदन ३८२-३८७ शास्त्र की गोपनीयता ३८८ चुम्बक, ज्ञानलुब्ध और नास्तिकों की अनर्हता ३८८-३९० ग्रन्थ की फलश्रुति ३९०-३९४ परिशिष्ट परापञ्चाशिका आद्यनाथविरचिता ३९५-४०० योगिनीहृदय-श्लोकार्द्धानुक्रमणी ४०१-४१२ परापञ्चाशिका-श्लोकार्द्धानुक्रमणी ४१३-४१४ मूले दीपिकायां च स्मृता ग्रन्थ-ग्रन्थकाराः ४१५-४१६ संकेतपरिचयः ४१७-४१८ दीपिकोद्धृतवचनानुक्रमणी ४१९-४३४