भारतकोश
योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi

अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा

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[ ५ ] अग. ६७४५५ तेलुगु लिपि अघ. ६७५९७ " सरस्वती भवन पुस्तकालय, वाराणसी स २३४६२ पत्र १-३ देवनागरी स्तोत्रविषयक सूची में चिद्विलासस्तव के साथ अखिल भारतीय संस्कृत परिषद्, लखनऊ ल १२८ पत्र ५७-६५ देवनागरी प्राच्य विद्या संशोधनालय, मैसूर म ७९८२/४९ पत्र २४७-२४९ नन्दीनागरी मु० मुद्रित पुस्तक, कश्मीर ग्रन्थावलि, श्रीनगर परापंचाशिका का परिचय परापंचाशिका के विषय में पृ० ८२ पर हमने एक टिप्पणी दी है। सौभाग्य से इसी संस्करण (३९५-४००) में इसका परिष्कृत संस्करण प्रकाशित किया जा सका है। परापंचाशिका के १८-२५ श्लोक शिवपुराण की कैलाससंहिता के १६।७०-८४ श्लोकों से बहुत मिलते-जुलते हैं। हम अन्यत्र¹ बता चुके हैं कि शिवपुराण में शिवसूत्र (६।१६। ४४ तथा ४६), शिवसूत्रवार्त्तिक (६।१६।४६) तथा विरूपाक्षपंचाशिका (६।१९।४४) उद्धृत हैं। दो स्थलों पर (३।४।११, ३।१२।१८) पुष्पदन्त रचित शिवमहिम्नस्तोत्र भी उद्धृत हुआ है। यह ध्यान देने की बात है कि परापंचाशिका से संबद्ध सामग्री भी उसी अध्याय में है, जिसमें कि शिवसूत्र और शिवसूत्रवार्त्तिक उद्धृत हैं। परापंचाशिका के १५ से १८ तक के श्लोकों की छः पंक्तियों की तथा ३८-४० श्लोकों की तुलना परात्रिंशिका के ६-९ श्लोकों से भी की जा सकती है। इसी तरह से ३२-३७ श्लोकों की विषय-प्रतिपादन प्रक्रिया अभिनवगुप्त के तन्त्रसार (पृ० १२-१५) में वर्णित प्रक्रिया से मिलती-जुलती है। इतना सब होते हुए भी यह छोटा-सा ग्रन्थ अपने आप में परिपूर्ण है। दीपिका (पृ० ३३३) में उद्धृत वचन इसका मंगल श्लोक लगता है, किन्तु उपलब्ध मातृकाओं में से किसी में भी यह नहीं मिलता। यहाँ प्रारम्भ में प्रकाश और विमर्शस्वरूप शिव और शक्ति की तथा उनसे जगत् की भी अभिन्नता युक्तियों के सहारे सिद्ध की गई है। यहाँ बताया गया है कि भेद और जड़ता ये दोनों अतात्त्विक हैं। वह सारा जगत् चिदेकमात्रसार है। प्रकाश के अतिरिक्त अन्य कुछ भी नहीं है। जैसे सूर्य को प्रकाशित करने के लिये दीपक की आवश्यकता नहीं १. तन्त्रयात्रा में प्रकाशित “शिवपुराणीयं दर्शनम्” शीर्षक निबन्ध (पृ. ५०-५१) देखिये।