युक्तिकल्पतरु (महाराज भोज - नौका-निर्माण, जलयान-विज्ञान, शस्त्र, दुर्ग एवं राजधर्म सटीक)

युक्तिकल्पतरु (महाराज भोज - नौका-निर्माण, जलयान-विज्ञान, शस्त्र, दुर्ग एवं राजधर्म सटीक)
Yuktikalpataru of Maharaja Bhoja with Commentary
महाराज भोज (सम्पादक: पण्डित ईश्वरचन्द्र शास्त्री) द्वारा
DevanagariHindipublished278 पृष्ठ
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कायव्यूहरीत्या मतादित्य-मृतकायं प्रविष्टः, तच्छरीरं पुनरुज्जीवया-
- कायव्यूहरीत्या : क ा य व ्य ू ह र ी त ्य ा (kayavyuha-ritya)
- मतादित्य-मृतकायं : म त ा द ि त ्य - म ृ त क ा य ं
- प्रविष्टः, : प ्र व ि ष ्ट ः , (with comma)
- तच्छरीरं : त च ् छ र ी र ं
- पुनरुज्जीवया- : प ु न र ु ज ् ज ी व य ा - (with hyphen)
मास। सचैकदा नानादिग्देशस्थान् सग्रन्थान् सूरीन् समाहूय
- मास। : म ा स । (with danda)
- सचैकदा : स च ै क द ा (together)
- नानादिग्देशस्थान् : न ा न ा द ि ग ् द े श स ् थ ा न्