भारतकोश
युक्तिकल्पतरु (महाराज भोज - नौका-निर्माण, जलयान-विज्ञान, शस्त्र, दुर्ग एवं राजधर्म सटीक)

युक्तिकल्पतरु (महाराज भोज - नौका-निर्माण, जलयान-विज्ञान, शस्त्र, दुर्ग एवं राजधर्म सटीक)

Yuktikalpataru of Maharaja Bhoja with Commentary

महाराज भोज (सम्पादक: पण्डित ईश्वरचन्द्र शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

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िश्रं द्वन्द्वमाचरेत् ॥ १३१ ॥`

Line 9: आश्रित्वा कृत्रिमं द्वन्द्वं बलवद्वैरिणोदिशि ।

Line 10: अन्यत्र कृत्रिमद्वन्द्वं कृत्वा नरपति र्व्वशेत् ॥ १३२ ॥ Wait, "र्व्वशेत्" or "र्व्वसेत्"? Look at the letter: र्व्व then शेत् or सेत्? It is शेत्: र्व्वशेत् (with talavya sha).

Line 11: रथपतिर्य्यदा वैरी जले (७) द्वन्द्वं तदाचरेत् । Wait, "वैरो" or "वैरी"? Line 11: वैरी - wait, look at the matra: it's an ee-kar with ra-phala: वैरी? Wait, वैरो? Look at: वै then री? It has a vertical line and a curve to the right, री. Wait, look at line 12: वैरो or वैरी? Line 12 has द्वैरो or द्वैरी? It has an ee-kar . द्वैरी.

Line 13: `गिरि-द्वन्द्वं नृपः सेवेन्मुख्यः

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