ज़फ़रनामा (श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी - विजय पत्र सटीक)
Zafarnama of Guru Gobind Singh Ji with Commentary
श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८ कि बेरूूँ नियायद कसे जाने दीवार। न खु़रदन्द तीर वा न गुशतन्द ख़्वार॥ के बेरूूँ नि-आयद कस-ए ज़ान-ए दीवार ना खु़रदन्द तीर वा ना गुशतन्द ख़्वार *के- कि *बेरूूँ- बाहर *नि-आयद- नहीं आता ("नि"-नहीं, "आयद"-आना ("आमदन") का अन्य पुरुष वर्तमान काल) *कस- कोई व्यक्ति *ज़ान- उससे *दीवार- दीवार *खु़रदन्द- खाया या लगा (अन्य पुरुष भूतकाल "खु़रदन"-खाना) *तीर- तीर *ना- नहीं *गुशतन्द- हुए (अन्य पुरुष भूतकाल "गशतन"-होना, फिरना) *ख़्वार- दुःखी, तुच्छ जो भी व्यक्ति उस दीवार के पीछे से बाहर नहीं आया, उसे न कोई तीर लगा और न ही वह दुःखी (मृत) हुआ। २९ चु दीदम कि नाहर बिआमद ब-जंग। चशीदह यके तीर तन बे-दरंग॥ चु दीदम के नाहर बि-आमद ब-जंग चशीद-एह यक-ए तीर तन बे-दरंग *चु- जब *दीदम- मैंने देखा (उत्तम पुरुष भूतकाल "दीदन"-देखना) *के- कि *नाहर- औरंगज़ेब की सेना का एक सेनापति *बि-आमद- आया ("आमद"-अन्य पुरुष भूतकाल "आमदन"-आना) *ब-जंग- युद्ध के लिए *चशीद- उसने चखा (अन्य पुरुष भूतकाल "चशीदन"-चखना) *यक- एक *तीर- तीर *तन- स्वयं *बे-दरंग- बिना विलंब, शीघ्र जब मैंने देखा कि नाहर युद्ध के लिए बाहर आया, तो बिना किसी विलंब के उसके शरीर ने एक तीर का स्वाद चखा (उसे तीर लगा)। ३० हम आख़िर गुरेज़द ब-जाए मुसाफ़। बसे ख़ान खु़रदन्द बेरूूँ ग़ज़ाफ़॥ हम आख़िर गुरेज़द ब-जाए मुसाफ़ ब-से ख़ान खु़रदन्द बेरूूँ ग़ज़ाफ़ *हम- भी *आख़िर- अंत में *गुरेज़द- भागा, पलायन किया *ब-जाए- उस स्थान से *मुसाफ़- युद्ध, समर *ब-से- अनेक *ख़ान- अफ़ग़ान *खु़रदन्द- खाया / बोला *बेरूूँ- बाहर *ग़ज़ाफ़- व्यर्थ की बातें, डींगें अंततः बहुत से अफ़ग़ान (ख़ान) जो बड़ी-बड़ी डींगें हाँकते थे, वे भी युद्धभूमि से भाग खड़े हुए। ३१ कि अफ़ग़ान दीगर बिआमद ब-जंग। चु सैले रवां हमचु तीरो तुफ़ंग॥ के अफ़ग़ान दीगर बि-आमद ब-जंग चु सैल-ए रवां हमचु तीर-ओ तुफ़ंग *के- कि *अफ़ग़ान- पठान *दीगर- दूसरा *बि-आमद- आया ("आमद"-अन्य पुरुष भूतकाल "आमदन"-आना) *ब-जंग- युद्ध के लिए *चु- जैसे *सैल- बाढ़ *रवां- प्रवाहित, बहता हुआ *हमचु- समान, तरह *तीर-ओ-तुफ़ंग- तीर और बंदूक (की गोलियाँ) फिर एक अन्य अफ़ग़ान युद्ध के लिए आगे आया, जो बहते हुए सैलाब की भाँति तीर और बंदूक की गोलियाँ बरसाता हुआ आया।