अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा
स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)
DevanagariHindipublished292 पृष्ठ
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( ५ ) विषय पृष्ठ संख्या ७४—कौन ऋतु सर्वोत्तम है ।२३६ ७५—पीर, बावर्ची, भिश्ती, खर २४० ७६—बनस्पति का बीज २४१ ७७—हौज के अण्डे २४२ ७८—कोई धनी और कोई दरिद्र क्यों होता है २४३ ७९—अब मैं उसको भूल गया २४४ ८०—बीरबल को कुत्तों की हाकिमी ,, ८१—एक हज़ार जूते २४४ ८२—चोर की दाढ़ी में तिनका २४५ ८३—सोया सो खोया २४६ ८४—मूर्ख से पाला पड़े तो चुप रहना २४७ ८५—बादशाह का नाखून २५२ ८६—योगी का भेष २५७ ८७—बीरबल की धर्म-रक्षा २५६ ८८—एक कृपिण पुरुष २६४ ८९—लकीर छोटी हो गई २६६ ९०—ब्राह्मणी पर मांसखोरी का अभियोग ,, ९१—खटिक और तेली २७३ ९२—दौलत ड्योढ़ी पर हाजिर है २७६