भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

पृष्ठ 6, कुल 811 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 6
१०विषयानुक्रमणिका
विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
गयीं, इस विषयमें रामदास-विष्णुदासका प्रश्नोत्तर२००सभी देशोंमें अबाध गतिसे घूमकर घोड़ेका अयोध्या लौटना२२०
पुष्पक विमानपर नित्य करोड़ों ब्राह्मणोंके भोजनका प्रबन्ध२०१चतुर्थ सर्ग<br>रामके अश्वमेध यज्ञमें सब देवताओं तथा शिवजीका आगमन, राम द्वारा सबका स्वागत-सत्कार होना और राम तथा शिवजीमें कुछ मनोरञ्जक वार्तालाप२२१
रामके पुष्पक विमानको देखकर अन्यान्य तीर्थवासियोंकी विविध कल्पनायें२०३अश्वमेध यज्ञमें कुम्भोदर मुनिका आगमन, रामके साथ बातचीत और कुम्भोदर मुनिका अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रसे रामकी स्तुति करना२२३
नवम सर्ग<br>उत्तर दिशाकी तीर्थयात्राका विवरण, रामको बदरीनारायण तथा मानसरोवरकी यात्रा, वहाँसे कैलास जाना और यहाँपर सीताका कामधेनु को पाना२०४पञ्चम सर्ग<br>विष्णुदासका गुरु रामदाससे अष्टोत्तरशतनाम-विषयक प्रश्न और उनका उत्तर२२४
सब तीर्थोंकी यात्रा करके रामका अयोध्या लौटना२०५रामाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र२२५
अयोध्यामें रामका भव्य स्वागत२०६रामाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रका माहात्म्य२२७
यात्राकाण्डकी फलश्रुति२०७षष्ठ सर्ग<br>यज्ञके समय रामकी दिनचर्या२२८
यागकाण्ड<br>प्रथम सर्ग<br>अश्वमेध यज्ञके लिए रामका गुरु वसिष्ठसे परामर्श२०८सप्तम सर्ग<br>ध्वजारोहणयज्ञके विषयमें प्रश्नोत्तर२३१
वसिष्ठका लक्ष्मणको यज्ञकी तैयारीके लिये संदेश देना२१०ध्वजारोहणविधि, माहात्म्य एवं फलश्रुति२३२
यज्ञकी सामग्रियोंका विवरण२११अष्टम सर्ग<br>अश्वमेध यज्ञकी समाप्तिपर रामको अवभृथ-स्नानके लिए यात्रा२३६
द्वितीय सर्ग<br>राम-सीताका यज्ञकी दीक्षा लेना२१३यात्राकालमें रामके दर्शनार्थ जनताकी व्यग्रता और रामका लक्ष्मणको सुप्रबन्धके लिए निर्देश२३७
श्यामकर्ण घोड़ेकी पूजा करके भूभ्रमणके लिये छोड़ना और शत्रुघ्न-सुमन्त आदिका उसकी रक्षाके लिये जाना२१४रामका सरयूमैं सपरिवार अवभृथस्नान२३८
यज्ञसमारोहमें बहुतेरे ऋषियोंका आगमन२१५कामधेनु गौ देनेको उद्यत रामसे वसिष्ठका सीताको दानमें माँगना२३९
यहाँ आए हुये ऋषियोंका रामके द्वारा स्वागत-सत्कार और कामधेनुकी पूजा करके पाकशालामें बाँधना तथा उससे मनचाही वस्तुयें प्राप्त करके सब अभ्यागतोंकी इच्छा पूर्ण करना२१६तदनुसार रामका सीताको दान देना और पुनः वसिष्ठकी बतायी योजनाके अनुसार सुवर्णराशि देकर सीताको वापस लेना२४०
तृतीय सर्ग<br>श्यामकर्ण घोड़ेके साथ शत्रुघ्नका ब्रह्मावर्त पहुँचना, वहाँ गङ्गाकी रुकावटसे दुखी होकर गङ्गाकी प्रार्थना करना और गङ्गाका प्रसन्न होकर उन्हें मार्ग देना२१७नवम सर्ग<br>अश्वमेध यज्ञकी समाप्तिपर शिवजीका रामसे वरदान माँगना और उनका देना२४१
श्यामकर्ण घोड़ेका मगधमें पहुँचना और वहाँके राजासे उपहार पाना२१८पार्वतीका सीताजीसे वर माँगना और उनका देना२४३