भारतकोश
अनुरागसागर वाणी

अनुरागसागर वाणी

Anuragsagar Vani

स्वामी मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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अंत समय का मीत

ऐसा कोई न दीखे भाई । अंतहु यम सो लेहि छुड़ाई ॥ अहै एक सो कहैं बखानी । जेहि अनुराग होय सो मानी ॥ सतगुरु आहि छुड़ावनहारा । निश्चय मानहु कहा हमारा ॥ कालहिं जीत हंस लै जाहीं । अविचल देस पुरुष जहँ आहीं ॥ जहाँ जाय सुख होय अपारा । बहुरि न आवै यहि संसारा ॥

इस संसार में ऐसा कोई नहीं दिखता, जो अंत समय में जीव को काल से बचा ले। एक है, और उसका मैं बखान करता हूँ, यदि उससे प्रीत लगा लो तो वो बचा सकता है। साहिब कह रहे हैं कि मेरा विश्वास करना, सदगुरु ही अंत समय में जीव का सच्चा मीत बनकर उसे काल से छुड़ा लेता है। वो काल को जीतकर हंस(आत्मा) को अपने साथ उस अचल देश में ले जाता है, जहाँ कभी न मिटने वाला परम-पुरुष रहता है; जहाँ जाकर हंस सच्चे असीम आनन्द को प्राप्त करता है और जहाँ से फिर इस संसार में वापिस नहीं आना होता।

Three stylized lotus flower symbols arranged horizontally, serving as a decorative separator.

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