अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 448, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंउपस्थित हो कर मैं रोग निवारण की प्रार्थना करता हूं. (१) त्रायन्तामिमं पुरुषं यक्ष्माद् देवेषितादधि. यासां द्यौष्पिता पृथिवी माता समुद्रो मूलं वीरुधां बभूव.. (२) पृथ्वी जिन की माता, आकाश जिन का पिता और सागर जिन का मूल है, वे जड़ीबूटियां दुर्भाग्य के कारण उत्पन्न इस राजयक्ष्मा रोग से इस पुरुष की रक्षा करें. (२) आपो अग्रं दिव्या ओषधयः. तास्ते यक्ष्ममेनस्य१मङ्गादङ्गादनीनशन्.. (३) हे रोगी पुरुष! जो पवित्र जल और दिव्य जड़ीबूटियां हैं, वे तेरे शरीर के प्रत्येक अंग से यक्ष्मा रोग का विनाश कर दें. (३) प्रस्तृणती स्तम्बिनीरेकशृङ्गाः प्रतन्वतीरोषधीरा वदामि. अंशुमतीः काण्डिनीर्या विशाखा ह्वयामि ते वीरुधो वैश्वदेवीरुग्राः पुरुषजीवनीः... (४) हे यक्ष्मा रोग से ग्रसित पुरुष! मैं तेरे स्वास्थ्य लाभ के निमित्त फैली हुई, बहुत सी टहनियों वाली, एक टहनी वाली, गांठों वाली, पत्तियों वाली, शाखाओं से रहित एवं नसों वाली जो जड़ीबूटियां तुझे जीवन देने वाली हैं, उन सभी अत्यधिक प्रभावशालिनी एवं समस्त देवों के निवास वाली जड़ीबूटियों को तेरे लिए ग्रहण करता हूं. (४) यद् वः सहः सहमाना वीर्यं १ यच्च वो बलम्. तेनेममस्माद् यक्ष्मात् पुरुषं मुञ्चतौषधीरथो कृणोमि भेषजम्.. (५) हे रोगों का विनाश करने वाली जड़ीबूटियों! तुम में जो रोग नाश करने वाली शक्ति, वीर्य और बल है, उस के द्वारा इस पुरुष की यक्ष्मा रोग से रक्षा करो. मैं सभी ओषधियों को मंत्रों से युक्त बनाता हूं. (५) जीवलां नघारिषां जीवन्तीमोषधीमहम्. अरुन्धतीमुन्नयन्तीं पुष्पां मधुमतीमिह हुवे ऽ स्मा अरिष्टतातये.. (६) कल्याण के निमित्त मैं जीवन देने वाली एवं क्रोध न करने वाली जीवंती एवं अरुंधती नामक जड़ी बूटियों का आह्वान करता हूं. ये जड़ीबूटियां ऊपर की ओर बढ़ने वाली, पुष्पों से युक्त एवं मधु सहित हैं. (६) इहा यन्तु प्रचेतसो मेदिनीर्वर्चसो मम. यथेमं पारयामसि पुरुषं दुरितादधि.. (७) मेरे मंत्रों के प्रभाव से चेतनायुक्त जड़ीबूटियां यहां आएं तथा इस रोग के कारण रूप ebook converter DEMO Watermarks*