भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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२१६ चरकसंहिता [ अ० १७ दुष्टरक्तातिमात्रत्वात्स वै शीघ्रं विदह्यते । ततः शीघ्रविदाहित्वाद्विद्रधीत्यभिधीयते ॥ ९४ ॥ व्यधच्छेद-भ्रमानाह-शब्द-स्फुरण-सर्पणैः । वातिकीं, पैत्तिकीं तृष्णा-दाह-मोह-मद-ज्वरैः ॥ ९५ ॥ जम्भोत्क्लेशारुचि-स्तम्भ-शीतकैः श्लैष्मिकीं विदुः । सर्वासु च महच्छूलं विद्रधीषूपजायते ॥ ९६ ॥ तप्तैः शस्त्रैरथा मध्येतोलमुकैरिव दह्यते । विद्रधी न्यम्लतां याता वृश्चिकैरिव दश्यते ॥ ९७ ॥ तनुरूक्षारुणं स्रावं फेनिलं वातविद्रधी । तिल-माष-कुलत्थोद-संनिभं पित्तविद्रधी ॥ ९८ ॥ श्लैष्मिकी स्रवति श्वेतं बहलं पिच्छिलं बहु । लक्षणं सर्वमेवैतद्द्रूजते सान्निपातिकी ॥ ९९ ॥ विद्रधि पिडका दो प्रकार की होती है यथा-बाह्या और आभ्यन्तरी । इनमें बाह्या विद्रधि त्वचा, स्नायु और मांस में उत्पन्न होती है, इसका आकार कण्डरा के समान होता है, इसमें बहुत वेदना होती है । अन्तः विद्रधि का निदान कहते हैं— ठण्डा भोजन, दाह करने वाला भोजन, उष्ण, रूक्ष, शुष्क भोजन के खाने से, बहुत खाने से, विरुद्ध भोजन से अजीर्णावस्था में भोजन करने से, संकीर्ण ( अर्थात् मिश्रण किये खाने से ) विषम भोजन से, प्रकृति के प्रतिकूल भोजन से, व्यापन्न अर्थात् दूषित भोजन से, बहुत मद्यपान से, उपस्थित वेगों को रोकने से, परिश्रम से, कुटिल व्यायाम ( अंगों को अनुचित रूप से मोड़ने-तोड़ने ) से, कुटिल शयन ( टेढ़ा-मेढ़ा होकर सोने ) से, बहुत बोझ उठाने से, बहुत मार्ग चलने से, बहुत मैथुन के कारण जब मल ( वात, पित्त, कफ ) शरीर के अन्दर मांस और रक्त में घुस जाते हैं, तब गहरी और कठोर गांठ उत्पन्न हो जाते हैं। गांठ उत्पन्न होने के स्थान—हृदय, क्लोम ( पित्ताशय या आमाशय ), यकृत्, प्लीहा, कुक्षि (पार्श्वों) में, वृक्कों ( गुर्दों ) में, नाभि में, वंक्षण ( जांघ की सन्धियों ) में और बस्ति ( मूत्राशय ) में उत्पन्न होती है और यहां तीव्र वेदना होती है। रक्त के बहुत अधिक दुष्ट होने से विद्रधि शीघ्र विदग्ध होने लगती है, विदग्ध होने से ही इसको 'विद्रधि' कहते हैं । वातजन्य विद्रधि में बींधने के समान, काटने के समान छेदने के समान पीड़ा होती है, चक्कर आता है, अफरा, शब्द सुनाई देता है, स्फुरण, धड़कन