भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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अ० ४ ] ४ सूत्रस्थानम् ४६ कामला रंग में मल श्वेत रंग का आता है, पीलापन नहीं आता ), 'मूत्र-संग्रह- णीय' ( मूत्र को कम करने वाला ), 'मूत्रविरजनीय' ( मूत्र के रंग को ठीक करने वाला ), मूत्रविरेचनीय ( मूत्रवर्धक ), यह पांच से बना कषाय वर्ग है॥ कासहरः श्वासहरः शोथहरो ज्वरहरः श्रमहर इति पञ्चकः कषायवर्गः । कासहर ( खांसी के लिये हितकारी ), श्वासहर ( दमे के लिये हितकारी ), शोथहर ( सूजन के लिये हितकारी ), ज्वरहर ( ज्वरनाशक ), श्रमहर ( थका- वट को मिटाने वाला ), यह पांच से बना कषाय वर्ग है ॥ दाहप्रशमनः शीतप्रशमन उददर्दप्रशमनोऽङ्गमर्दप्रशमनः शूलप्रशमन इति पञ्चकः कषायवर्गः । 'दाहप्रशमन' ( जलन को शान्त करने वाला ), 'शीतप्रशमन' ( ठंडक को दूर करनेवाला ), 'उदर्द प्रशमन' ( कोठ, छपाकी, त्वचा पर उठने वाले मोटे २ चकत्तों को शान्त करने वाला ), 'अंगमर्द प्रशमन' ( अंगों को ऐंठन को दूर करने वाला ), यह पाँच से बना कषाय वर्ग है ॥ शोणितस्थापनो वेदनास्थापनः संज्ञास्थापनः प्रजास्थापनो वयः- स्थापन इति पञ्चकः कषायवर्गः । 'शोणित-स्थापन' ( रक्त रोधक ), 'वेदनास्थापन'* ( पीड़ा नाशक ), 'संज्ञास्थापन' ( चेतन करने वाला ), 'प्रजास्थापन' ( संतानजनक ), वयः- स्थापन' ( आयु को टिकाने वाला ), यह पांच से बना कषायवर्ग है । इति पञ्चाशन्महाकषायाः, महतां च कषायाणां लक्षणोदाहरणार्थं व्याख्याता भवन्ति । तेषामेककस्मिन्महाकषाये दशदशावयविकान्कषा- याननुव्याख्यास्यामः । तान्येव पञ्च कषायशतानि भवन्ति ॥ १३ ॥ इस प्रकार से पचास महाकषाय बनते हैं । महाकषाय के लक्षण और उदाहरण संक्षेप में कह दिये गये हैं । इन एक-एक महाकषायों में दस-दस अव- यवों वाले कषायों की व्याख्या आगे कहेंगे । इस प्रकार से पांच सौ कषाय बनते हैं । अर्थात् 'जीवनीय' आदि संज्ञा वाले पचास महाकषायों में से प्रत्येक 'जीव- नीय' आदि संज्ञा वाले कषाय में दस-दस अवयव हैं ॥ १३ ॥ तद्यथा - जीवकर्षभकौ मेदा महामेदा काकोली क्षीरकाकोली मुद्गमाषपर्ण्यौ जीवन्ती मधुकमिति दशेमानि जीवनीयानि भवन्ति (१) *वेदना-स्थापन—शरीर की वेदना को मिटाकर शरीर को स्वस्थ रूप में करने वाला ।