भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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अदरक ), अम्लवेतस, मरिच ( काली मिरच ), अजमोदा ( अजवायन ), भल्लातकास्थि ( भिलावे के बीज ), हिंगु-निर्यास ( हींग ), ये दस ‘दीपनीय’ अर्थात् भूख लगाने वाले अग्नि संदीपक हैं ॥ यह छः का बना हुआ कषायवर्ग है । ऐन्द्रयृषभ्यतिरसर्ष्यप्रोक्ता-पयस्याश्वगन्धा-स्थिरा-रोहिणी-बलाति- बला इति दशेमानि बल्यानि भवन्ति ॥ (७)॥ ऐन्द्री, ऋषभी ( कौंच ), अतिरसा ( शतावरी ), ऋष्यप्रोक्ता ( माषपर्णी ), पयस्या ( विदारी ), अश्वगन्धा ( असगन्ध ), स्थिरा ( शालपर्णी ), रोहिणी (कटुकी), बला ( खरैंटी ), अतिबला ( पीतबला ), ये दस 'बल्य' अर्थात् बल कारक हैं ॥ चन्दन-तुङ्ग-पद्मकोशीर-मधुक-मञ्जिष्ठा-सारिवा-पयस्या-सिता- लता इति दशेमानि वर्ण्यानि भवन्ति ॥ (८) ॥ चन्दन ( लाल चन्दन ), तुंग ( लाल नाग केशर ), पद्मक ( पद्माख ), उशीर ( खस ), मधुक ( मुलहठी ), मञ्जिष्ठा ( मजीठ ), सारिवा (अनन्तमूल), पयस्या (विदारी कन्द), सिता (सफेद दूब), और लता १ (लाल दूब या प्रियंगु), ये दस ‘वर्ण्य’ अर्थात् वर्णकारक, वर्ण बढ़ाने वाले हैं ॥ सारिवेक्षुमूल-मधुक-पिप्पली-द्राक्षा-विदारी-कैडर्य-हंसपदी-बृहती- कण्टकारिका इति दशेमानि कण्ठ्यानि भवन्ति ॥ ( ९ ) ॥ सारिवा ( अनन्तमूल ), इक्षुमूल ( ईख की जड़ ), मधुक ( मुलहठी ), पिप्पली, द्राक्षा ( किशमश ), विदारी कन्द, कैडर्य ( नीम ), हंसपदी ( मण्डू- कर्णी या ब्राह्मी ), बृहती ( बड़ी कटेरी ), कण्टकारिका ( छोटी कटेरी ), ये दस औषधियां 'कण्ठ्य' स्वर के लिये हितकारी हैं ॥ आम्राम्रातक-निकुच-करमर्द-वृक्षाम्लाम्लवेतस-कुवल-बदर-दाडिम- मातुलुङ्गानीति दशेमानि हृद्यानि भवन्ति ॥ (१०) ॥ इति चतुष्कः कषायवर्गः ॥ [२] ॥ आम्र ( आम ), आम्रातक ( अम्बाड़ा ), निकुच ( बडु बड़इल ), करमर्द ( करञ्ज ), वृक्षाम्ल ( इमली ); अम्लवेतस, कुवल ( बड़ा बेर ), बदर ( झाड़ी का बेर ), दाडिम ( अनार ), मातुलुंग ( बिजौरा ), ये दस ‘हृद्य’ अर्थात् हृदय के लिये हितकारी हैं ॥ यह चार से बना हुआ कषायवर्ग है । १. जल्पकल्पतरु में 'लता' का अर्थ मंजीठ किया है, परन्तु मंजीठ का कथन भी इसमें है, अतः दूब अर्थ ही उचित है ।

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