भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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५४ चरकसंहिता [ अ० ४ कुष्ठैलवालुक-कट्फल-समुद्रफेन-कदम्ब-निर्यासेक्षु-काण्डेक्ष्विक्षुरक- वसुकोशीराणीति दशेमानि शुक्रशोधनानि भवन्ति ॥ ( २० ) ॥ इति चतुष्कः कषायवर्गः ॥ [ ४ ] ॥ कुष्ठ ( कूठ ), एलवालुक, कट्फल ( कायफल ), समुद्रफेन, कदम्ब निर्यास, इक्षु ( गन्ना ), काण्डेक्षु ( मोटा गन्ना ), इक्षुरक ( तालमखाना ); बसुक ( बक- पुष्प ), और उशीर ( खस की जड़ ) ये दस ‘शुक्रशोधन’ अर्थात् वीर्य-धातु को शुद्ध करने वाले हैं॥ यह चार का बना हुआ कषाय वर्ग है । मृद्वीका-मधुक-मधुपर्णी-मेदा-विदारी-काकोली-क्षीरकाकोली-जीवक- जीवन्ती-शालपर्ण्य इति दशेमानि स्नेहोपगानि भवन्ति ॥ ( २१ ) ॥ मृद्वीका ( बड़ी दाख ), मधुक ( मुलहटी ), मधुपर्णी ( गिलोय ), मेदा, विदारी ( विदारी कन्द ), काकोली, क्षीरकाकोली, जीवक, जीवन्ती, शालपर्णी ये दस 'स्नेहोपग' अर्थात् शरीर में कोमलता और चिकनाई उत्पन्न करनेमें सहायक हैं॥ शोभाञ्जनकैरण्डार्क-वृश्चीर-पुनर्नवा-यव-तिल-कुलत्थ-माष-बदरा- णीति दशेमानि स्वेदोपगानि भवन्ति ॥ ( २२ ) ॥ शोभांजन ( सहजन ), एरण्ड, अर्क ( आक ), वृश्चीर ( श्वेत पुनर्नवा ), पुनर्नवा ( रक्त पुनर्नवा ), यव ( जौ ), तिल, कुलत्थ ( कुलथी ), माष ( उड़द ), बदर ( झाड़ी के बेर ) ये दस ओषधियां 'स्वेदोपग' अर्थात् शरीर में पसीना लाने में सहायक हैं॥ मधु-मधुक-कोविदार-कर्बुदार-नीप-विदुल - बिम्बी-शणपुष्पी-सदा- पुष्पी-प्रत्यक्पुष्प्य इति दशेमानि वमनोपगानि भवन्ति ॥ (२३) ॥ मधु ( शहद ), मधुक ( मुलहटी ), कोविदार ( लाल कचनार ), कर्बुदार ( श्वेत कचनार ), नीप ( कदम्ब ); बिदुल ( जल वेतस ), बिम्बी ( कन्दरी), शणपुष्पी ( झनझनिया ), सदापुष्पी ( आक ), प्रत्यक्पुष्पी ( अपामार्ग, चिर- चटा ) ये दस ‘वमनोपग’ अर्थात् वमन में मदद देती हैं॥ द्राक्षा-काश्मर्य-परूषकभयामलक-बिभीतक-कुवल-बदर-कर्कन्धू-पी- लूनीति दशेमानि विरेचनोपगानि भवन्ति ॥ ( २४ ) ॥ द्राक्षा ( किशमिश ), काश्मर्य ( गम्भारी ), परूषक ( फालसा ), अभया ( जंगी हरड़ ), आमलक ( आंवला ), बिभीतक ( बहेड़ा ), कुवल (बड़ा बेर), बदर ( वृक्ष का बेर ), कर्कन्धू ( झाड़ी का बेर ), पीलू ये दस 'विरेचनोपग' अर्थात् विरेचन में सहायक हैं॥