सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
पृष्ठ 18, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-श्री दादूलीला विहंगावलोकन उठ कर आकाश मार्ग से होती हुई धीरे धीरे भैराणा पर्वत के एक खोल (वर्तमान दादूखोल) में पहुँची । सारा शिष्यवृंद तथा विशाल जनसमुदाय भी पालकी के पीछे - पीछे वहां पहुँच गया । दादू खोल में पालकी के स्थित होते ही एक अद्भुत दिव्य दृश्य नभ मंडल में दिखाई पड़ा । देव, गंधर्व, किन्नर आदि प्रकट होकर जय जयकार करते हुए पुष्प केशर की वर्षा करने लगे, अप्सराएं यशोगान करती हुई नृत्य करने लगीं । ठीक यही दृश्य श्री महाराजजी के प्राकट्य के दिन भी उपस्थित हुआ था और संयोग से उस दिन भी अष्टमी तिथि थी । सारे भक्तजन इस अनोखे दृश्य को देखकर आश्चर्य, आनंद एवं श्रद्धा से प्लावित हो गए । तत्पश्चात् अचानक पालकी फिर ऊपर उठी और उड़ती हुई भैराणा पर्वत की एक गुफा ( यहां वर्तमान गुफा मंदिर है ) के द्वार तक गई । पालकी के गुफा में प्रविष्ट होने के पूर्व श्री महाराज जी ने दाहिना कर - कमल वरद मुद्रा में उठाकर उच्च स्वर से “संतों ! भक्तों ! सत्यराम” का उद्घोष किया और पालकी गुफा में अंतर्ध्यान होगई । तभी से दादू सम्प्रदाय में “सत्यराम” महामंत्र का प्रयोग आशीर्वादात्मक तथा अभिवादनात्मक दोनों भावों में किया जाता है । जब भी दादू भक्तों को परस्पर अभिवादन करना होता है या आशीर्वाद देना होता है तब अपने सद्गुरुदेव का स्मरण करते हुए “सत्यराम” का उच्चारण करते हैं, अतः यह श्रेष्ठ अभिवादन है । ( परम श्रद्धेय श्री दादूदयालजी महाराज की यह संक्षिप्त जीवनी है )
- 18 -