सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-महिमा महात्म्य भये सम्पूर्ण पद अरु साखी, भक्ति मुक्ति तिनमें सो भाखी । मनसा वाचा बाचै कोई, ताकूँ आवागमन न होई ॥5॥ वाणी दादू दयालु की, सब शास्त्रन को सार । पढे विचारे प्रीती सूं, जे जन उतरे पार ॥ 6 ॥ दादू दीन दयालु की, वाणी विस्वावीस । तिनकूं खोजि विचार करि, अंग धरे सैंतीस ॥ 7 ॥ तिन माहीं जो हारडे, तिनके तिते स्वरुप । कोई विवेकी केलवे, काढै अर्थ अनूप ॥ 8 ॥ वाणी दादू दयालु की, वाणी कंचन रूप । कोई इक सोनी संत जन, घड़ि हैं घाट अनूप ॥ 9 ॥ वाणी दादू दयालु की, वाणी अनुभव सार । जो जन या हृदय धरै, सो जन उतरे पार ॥ 10 ॥ जे जन पढ़े जु प्रीति सूं, उपजे आत्मज्ञान । तिनकूं आनन भास ही, एक निरंजन ध्यान ॥ 11 ॥ जिनके या हृदय बसी, याही में मन दीं । तिनकूं अति मीठी लगी, आठ पहर लैलीन ॥ 12 ॥ वेद पुराण सब शास्त्र, और जीते जो ग्रन्थ । तिनको बोध बिलोइकै, यह काढ्या निज मंथ ॥ 13 ॥ बोले दादू दासजी, साचै शब्द रसाल । तिनकी उपमा को कहै, मानो उगले लाल ॥ 14 ॥ या वाणी सुनि ज्ञान ह्वे, याही तै वैराग्य । या सुन भजन भक्ति बढ़े, या सुन माया त्याग ॥ 15 ॥ या वाणी पढ़ि प्रेम ह्वे, या पढ़ि प्रीति अपार । या पढ़ि निश्चय नाम की, या पढ़ि प्राण अधार ॥ 16 ॥
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