भारतकोश
विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

Harivamsha Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,169 पृष्ठ

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( १४ )

१०८-हंस और डिम्भकद्वारा संन्यासकी निन्दा तथा जनार्दनद्वारा संन्यास-आश्रमका मण्डन .... १०४९

१०९-दुर्वासाका रोष, हंसद्वारा उनका तिरस्कार, दुर्वासाद्वारा उन दोनोंके लिये शाप और जनार्दनके लिये वरदान ... ... १०५०

११०-दुर्वासा आदि मुनियोंका द्वारकागमन .... १०५२

१११-श्रीकृष्णकी गोलक्रीडा, सुधर्मा सभामें दुर्वासा आदि मुनियोंका आगमन तथा यादवों और श्रीकृष्णद्वारा उनका सत्कार, श्रीकृष्णका उनसे वहाँ आनेका कारण पूछना और दुर्वासाका भगवान्‌की स्तुति एवं उपालम्भपूर्वक उनके प्रश्नका प्रतिवाद करके अपनी दुर्दशाका वृत्तान्त सुनाना ... .... १०५३

११२-भगवान् श्रीकृष्णकी हंस और डिम्भकके वधके लिये प्रतिज्ञा तथा क्षमा-प्रार्थनापूर्वक उनका यतियोंको भोजन कराना ... १०५८

११३-जनार्दनका हंसको समझाना; किंतु हंसका उनकी बात न मानकर उन्हें दूत बनाकर द्वारकाको भेजना ,.... ... १०५९

११४-जनार्दनकी भगवद्दर्शनविषयक उत्कण्ठा ... १०६१

११५-जनार्दनका सुधर्मा-सभामें जाकर भगवान् श्रीकृष्णके दर्शनसे संतुष्ट हो उनकी आज्ञासे भगवत्स्तवनपूर्वक हंस और डिम्भकका संदेश सुनाना और उसे सुनकर यादवोंका उपहास करना .... .... .... १०६४

११६-श्रीकृष्णका जनार्दनको संदेश देकर लौटाना १०६७

११७-सात्यकिसहित जनार्दनका शाल्वनगरमें जाना, हंससे मिलना तथा हंसका जनार्दनसे कार्य-सिद्धिके विषयमें पूछना .... .... १०६७

११८-जनार्दनका हंसको श्रीकृष्णदर्शनजनित अपना उल्लास बताना, द्वारकामें हंसके संदेशकी प्रतिक्रियाका वर्णन करके उसे राजसूय न करनेकी सलाह देना, हंसका उसे रोषपूर्वक तिरस्कृत करके चले जानेके लिये कहना, फिर सात्यकिका हंसको श्रीकृष्णका संदेश सुनाते हुए फटकारना ... .... १०६८

११९-हंस और डिम्भकके सात्यकिके प्रति रोषपूर्ण वचन तथा सात्यकिका उन्हें वैसा ही उत्तर देकर द्वारकाको प्रस्थान .... ... १०७२

१२०-भगवान् श्रीकृष्ण तथा यादवसेनाका पुष्कर-तीर्थमें जाकर हंस और डिम्भककी प्रतीक्षा करना १०७३

१२१-हंस और डिम्भककी सेनाओंका पुष्करतीर्थमें प्रवेश .... = .... १०७५

१२२-उभयपक्षकी सेनाओंका घमासान युद्ध ... १०७७

१२३-श्रीकृष्ण और विचक्रका घोर युद्ध तथा विचक्रका वध .... ... १०७८

१२४-हंस और बलभद्रका युद्ध ... .... १०८०

१२५-सात्यकि और डिम्भकका युद्ध .... १०८१

१२६-हिडिम्बके साथ वसुदेव और उग्रसेनका युद्ध तथा बलभद्रके द्वारा हिडिम्बका वध .... १०८३

१२७-गोवर्धन पर्वतके समीप हंस और डिम्भकके साथ यादवोंका युद्ध, श्रीकृष्णद्वारा भूतेश्वरोंकी पराजय तथा श्रीकृष्ण और हंसका घोर युद्ध १०८६

१२८-श्रीकृष्णद्वारा हंसका वध .... .... १०८९

१२९-डिम्भककी आत्महत्या .... .... १०९०

१३०-गोप-गोपियोंसहित यशोदा और नन्दका गोवर्धन पर्वतपर आकर श्रीकृष्ण और बलभद्रसे मिलना .... .... १०९१

१३१-द्वारका जाते हुए श्रीकृष्णका पुष्करमें ऋषियोंसे मिलना तथा ऋषियोंद्वारा उनका स्तवन १०९२

१३२-महाभारत और हरिवंशके श्रवणकी विधि और फल, वाचकके गुण, प्रत्येक पर्वपर दान देने योग्य वस्तु, एकसे लेकर दस पारणाओंकी महत्ता तथा महाभारत एवं हरिवंशका माहात्म्य .... .... १०९३

१३३-त्रिपुर-वधकी कथा .... .... ११०४

१३४-हरिवंशमें वर्णित वृत्तान्तोंका संग्रह .... ११०५