हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)
Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary
गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहित चौरासी • • २६ अस्तु, उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट हो जाता है कि श्रीहितहरिवंश चन्द्र की आराध्या श्रीराधा हैं जो कि श्रीकृष्ण आराध्या , परा एवं स्वतन्त्रा शक्ति ही नहीं वरन श्रीकृष्ण की भी शासन कर्त्री और प्रेम रस (की भी) हृदय रूपा हैं। पुराणों एवं श्रुतियों में राधा के जिस रूप का वर्णन है वह रसिकाचार्य्य श्रीहित हरिवंश को स्वीकार नहीं है क्योंकि वहाँ श्रीराधा का स्वरूप श्रीकृष्ण आराधिका (विशेष प्रेमी भक्ता) मात्र है। अतएव श्रुति अनुमोदित राधा के रूप के भाव को अस्वीकार (गौण) करके आपने श्रीराधा का रूप श्रुति शेखर, श्रुति हृदय और श्रुति अलक्षित ही अपने ग्रन्थों में यत्र तत्र बताया है देखिये- (१) अलक्ष्यं राधाख्यं निखिल निगमैरप्यात्तितरां रसाम्भोधेः सारं... अर्थात् "राधा नामक कोई रसाम्भोधि सार तत्व समस्त वेदों को भी अत्यन्त अलक्षित है।" (२) यद वृन्दावन मात्र गोचरमहो यन्नश्रुतीकं शिरो- प्यारोढुं क्षमते न यच्छिव शुकादीनां तु यद्ध्यानगम्।। अर्थात् "जो केवल श्रीवृन्दावन मात्र में दृष्टि गोचर होता है; जिसका वर्णन करने में श्रुति शिरोभाग उपनिषद् भी समर्थ नहीं हैं, जो शुक शिवादि के भी ध्यान में नहीं आता।" (३) श्रीराधा श्रुति मौलि शेखर लता नाम्नी मम प्रीयताम्। अर्थात् श्रीराधा नामक श्रुति मौलि शेखर लता मुझ पर प्रसन्न हों।" श्रीहिताचार्य्य पाद की राधा केवल वेदों से ही अलक्षित नहीं वरं वेद वादियों और वेद प्रतिपाद्य ब्रह्म से भी अलक्षित है- ब्रह्मेश्वरादि सुदुरूह पदारविन्द श्रीमत्पराग परमाद्भुत वैभवायाः। सर्वार्थसार रस वर्षि कृपार्द्र दृष्टेस्तरया नमोस्तुवृषभानु भुवोमहिम्ने।।
- श्रीराधा सुधा निधि, श्लोक२ अर्थात् "जिनके चरण कमल ब्रह्मा शङ्कर आदि के लिये भी अत्यन्त सुदुरूह हैं,.......मैं उन्हीं श्रीवृषभानु नन्दिनी जू की महिमा को नमन करता हूँ।"